लखनऊ PWD मुख्यालय में आग पर घमासान, अखिलेश यादव ने कसा तंज, बोले- अब क्या सड़क गायब कर देंगे?

उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) के लखनऊ मुख्यालय में 19-20 मार्च की रात लगी आग को आधिकारिक तौर पर शॉर्ट सर्किट बताया गया है। लेकिन विभागीय सूत्र दावा कर रहे हैं कि आग में सैकड़ों करोड़ के सड़क निर्माण टेंडरों से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें जल गई हैं। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे भ्रष्टाचार छिपाने की कोशिश बताते हुए नई सरकार आने पर जांच का ऐलान किया है, जिससे इस घटना पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है।
akhilesh yadav

लखनऊ: उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुख्यालय में 19-20 मार्च की दरमियानी रात को लगी आग अब सवालों के घेरे में है। सरकारी तौर पर इसे शॉर्ट सर्किट बताया गया है, लेकिन विभागीय सूत्रों का दावा है कि इस आग में प्रदेश स्तर की सैकड़ों करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें, आकलन दस्तावेज और कंप्यूटर उपकरण जल गए। हाल के महीनों में जारी हुए विवादास्पद टेंडरों को लेकर भी विवाद सामने आए थे, ऐसे में इस घटना को भ्रष्टाचार छिपाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

निर्माण भवन स्थित प्रमुख अभियंता कार्यालय परिसर के कक्ष संख्या A-014, जिसे आंबेडकर सेल कहा जाता है, में 19 मार्च की रात कंप्यूटर उपकरण में आग लगी थी। 20 मार्च की सुबह जब कमरा खोला गया, तो अंदर धुआं भरा था, लेकिन आग खुद बुझ चुकी थी। विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि आग सिर्फ एक कमरे तक सीमित रही, किसी दूसरे कक्ष में नहीं फैली और किसी भी महत्वपूर्ण दस्तावेज या अभिलेख को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। विभाग ने यह भी कहा कि आग बुझने के बाद तत्काल जरूरी कार्रवाई की गई।

हालांकि, विभागीय सूत्र इस आधिकारिक बयान से बिल्कुल अलग बात कह रहे हैं। उनके मुताबिक, आग में सड़क निर्माण से जुड़ी कई अहम फाइलें, जैसे तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट, लागत अनुमान (एस्टीमेट), ठेकेदारों के प्रस्ताव और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड, पूरी तरह से जलकर खाक हो गए हैं। सूत्रों का दावा है कि पिछले कुछ महीनों में सैकड़ों करोड़ रुपये के टेंडरों को लेकर कई विवादास्पद मामले सामने आ चुके थे, जिसने इस आग की घटना को और भी संदिग्ध बना दिया है। ये टेंडर मुख्य रूप से प्रदेश की बड़ी सड़क परियोजनाओं से संबंधित थे, जिन पर पहले से ही सवाल उठ रहे थे और कई अनियमितताओं के आरोप भी लगे थे।

अखिलेश यादव ने घटना पर कसा तंज

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया दी और सोशल मीडिया पर तीखा तंज कसा। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, “चाहे फाइलें जल जाएं या कुछ और हो जाए, नई सरकार आएगी तो भ्रष्टाचार की जांच करवाएगी। अब क्या सड़क गायब कर देंगे?” अखिलेश ने इशारों-इशारों में कहा कि भले ही भ्रष्टाचार के सबूत वाली फाइलें नष्ट कर दी गई हों, लेकिन सड़क परियोजनाएं जमीन पर मौजूद हैं और उन्हें गायब नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 2027 के विधानसभा चुनावों में नई सरकार आने पर इस पूरे मामले की गहराई से जांच कराई जाएगी। उन्होंने इस आग को भ्रष्टाचार के सबूत मिटाने की कोशिश बताया और कहा कि यह सीधा-सीधा सरकारी तंत्र में व्याप्त अनियमितताओं की तरफ इशारा करता है।

टेंडर में घपले और आग का कनेक्शन

अखिलेश यादव का यह इशारा हाल के दिनों में जारी हुए टेंडरों को लेकर है, जिन पर पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे थे। विभागीय सूत्रों का कहना है कि पिछले छह महीनों में विभाग ने कई बड़ी सड़क परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी किए थे। इनमें से कुछ टेंडर ऐसे थे जिन पर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने, तकनीकी नियमों की अनदेखी करने और अनुमानित लागत से अधिक दरें तय करने के आरोप लगे थे। विशेष रूप से, पिछले महीने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से जुड़े एक विधायक के घर पर हुई छापेमारी के बाद यह आग और भी ज्यादा संदेहास्पद लगने लगी है। इस छापेमारी में भी टेंडरों और निर्माण परियोजनाओं से संबंधित कुछ दस्तावेज मिले थे, जिनकी जांच चल रही थी।

विपक्ष ने घटना पर खड़े किए सवाल

इस पूरी घटना ने लोक निर्माण विभाग में जारी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दल इसे केवल एक हादसा मानने को तैयार नहीं हैं। उनका आरोप है कि यह आग भ्रष्टाचार के उन पुख्ता सबूतों को नष्ट करने की एक सोची-समझी साजिश है, जो इन टेंडरों में हुए घपलों को उजागर कर सकते थे। विभाग ने घटना की जांच के आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन विपक्ष इन आदेशों को महज एक औपचारिकता मान रहा है। सवाल अभी भी अनसुलझा है: आग लगी है या लगाई गई है? यह सवाल प्रदेश की जनता और विपक्षी दलों के मन में गहरा बैठा हुआ है।

लोक निर्माण विभाग राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर ग्रामीण और शहरी सड़कों, पुलों और सार्वजनिक भवनों के निर्माण में। ऐसे में विभाग के मुख्यालय में आग लगना और करोड़ों के दस्तावेजों का जल जाना, जनता के भरोसे को हिलाता है। इस घटना ने सरकार पर भी दबाव बढ़ा दिया है कि वह केवल एक आंतरिक जांच तक सीमित न रहे, बल्कि किसी स्वतंत्र एजेंसी से इसकी उच्च स्तरीय जांच कराए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। जब तक इस आग की असली वजह सामने नहीं आती, तब तक यह घटना उत्तर प्रदेश के निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती रहेगी और राजनीतिक गलियारों में इसकी गूंज सुनाई देती रहेगी।

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