लखनऊ: उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुई दरोगा भर्ती परीक्षा एक सवाल और उसके विकल्पों को लेकर गंभीर विवादों में घिर गई है। 14-15 मार्च को आयोजित इस परीक्षा में ‘अवसर के हिसाब से बदल जाने वाले’ के लिए दिए गए विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द शामिल करने पर सामाजिक और राजनीतिक जगत में उबा ल आ गया है। इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है, और प्रदेश सरकार को जांच के आदेश देने पड़े हैं।

यह पूरा विवाद सामान्य हिंदी के प्रश्नपत्र में पूछे गए एक सवाल से शुरू हुआ। प्रश्न था- ‘अवसर के हिसाब से बदल जाने वाले को क्या कहेंगे?’ इसके चार विकल्प दिए गए थे: (A) पंडित, (B) अवसरवादी, (C) निष्कपट और (D) सदाचारी। जैसे ही यह प्रश्नपत्र सार्वजनिक हुआ, ‘पंडित’ विकल्प को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई, जो जल्द ही बॉलीवुड और राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गई।

मनोज मुंतशिर ने जताई खुली नाराजगी

जाने-माने लेखक और गीतकार मनोज मुंतशिर ने इस मामले पर सबसे पहले और सबसे तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट लिखकर प्रश्नपत्र बनाने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की।

“दरोगा भर्ती परीक्षा में पूछा गया है अवसर के अनुसार बदल जाने वाला क्या कहलाता है और ऑप्शन में पंडित लिखा है। ये प्रश्नपत्र जिसने भी तैयार किया है, सरकार उसे फौरन दण्डित और निलंबित नहीं करती तो इस देश के हर सवर्ण और ब्राह्मण को स्पष्ट संकेत जाएगा कि सत्ता में हमारी सुनने वाला कोई नहीं है।”- मनोज मुंतशिर

उन्होंने आगे लिखा, ‘समस्त सवर्णों की ओर से मैं अपनी खुली नाराजगी दर्ज करवाता हूं और जान बूझकर किये गए इस निंदनीय कृत्य की घोर आलोचना करता हूं।’ उनके इस पोस्ट के बाद कई यूजर्स ने उनके समर्थन में आवाज उठाई और प्रश्न को लेकर रोष व्यक्त किया।

सरकार ने लिया संज्ञान, डिप्टी सीएम ने दिए जांच के आदेश

विवाद के बढ़ते ही उत्तर प्रदेश सरकार हरकत में आई। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है।

डिप्टी सीएम पाठक ने एक पोस्ट में कहा, ‘उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में आए एक प्रश्न को लेकर जो विकल्प दिए गए उन पर हमे कड़ी आपत्ति है। सरकार ने गंभीरता से संज्ञान में लिया है… मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों को कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। इस पूरे मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’

राजनीतिक गलियारों में भी गूंजा मुद्दा

यह मामला अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव समेत विपक्ष के कई नेताओं ने इस सवाल को लेकर मौजूदा सरकार पर निशाना साधा है। एक तरफ जहां विपक्ष इसे सरकार की विफलता बता रहा है, वहीं सरकार ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का वादा कर स्थिति को संभालने की कोशिश की है। गौरतलब है कि यूपी पुलिस सब इंस्पेक्टर के 4,543 पदों के लिए हुई इस भर्ती परीक्षा में 15 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी शामिल हुए थे।