माफिया अतीक अहमद के बेटे की सड़क दुर्घटना में मौत, डिवाइडर से टकराई तेज रफ्तार कार, झांसी जेल में बंद बड़े भाई से मिलने जा रहा था

21 वर्षीय अबान अहमद चार दोस्तों के साथ झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलने जा रहा है, कार उसका दोस्त सोनू चला रहा था जबकि बगल वाली सीट पर अबान बैठा था।
Atiq Ahmed son Aban dies in a road accident Jhansi

Atiq Ahmed son Aban dies in a road accident Jhansi

उत्तर प्रदेश के झांसी में आज गुरुवार सुबह एक सड़क दुर्घटना में माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की मौत हो गई। हादसा झांसी-कानपुर हाईवे पर हुआ, अबान की तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और चकनाचूर हो गई। इस दुर्घटना में अबान के दोस्त सोनू की भी मौत हो गई व तीन दोस्त घायल हो गए।

जानकारी के मुताबिक अबान अहमद आज सुबह प्रयागराज से झांसी के लिए निकला था वो झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलने जा रहा था।  गाड़ी अबान का दोस्त सोनू चला रहा था और बगल वाली सीट पर अबान बैठा था उसकी गाड़ी रफ़्तार में दौड़ रही थी तभी अचानक रास्ते में एक जानवर सामने आ गया। जानवर को देखते ही  सोनू ने गाड़ी के ब्रेक लगाए लेकिन कार की रफ़्तार तेज होने से वो अनियंत्रित हो गई और डिवाइडर से जाकर टकरा गई।

अबान के साथ उसके दोस्त सोनू की भी मौत 

टक्कर इतनी जोरदार थी कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, बताया जा रहा है कि कार में अबान और सोनू  के अलावा उमर अहमद, मोहम्मद जैद और असलम भी थे, कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और सब उसमें फंस गए,  दुर्घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने कार में फंसे लोगों को गेट काटकर बाहर निकाला।

दुर्घटना में तीन लोग घायल, अस्पताल में भर्ती 

पुलिस ने सभी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोंठ पहुंचाया जहां डॉक्टर्स ने अबान और सोनू को मृत घोषित कर दिया वहीं दुर्घटना में घायल उमर अहमद, मोहम्मद जैद और असलम को भर्ती कर लिया जिन्हें बाद में प्रयागराज रेफर कर दिया गया, पुलिस ने मृतकों के शव को पोस्ट मार्टम के लिये झांसी भेज दिया है। पुलिस हादसे की जांच कर रही है और ये पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दुर्घटना की वास्तविक वजह क्या थी।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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