उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ गया है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा और तीखा हमला किया है। यह प्रतिक्रिया सपा द्वारा मान्यवर कांशीराम की जयंती को ‘पीडीए दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा के बाद आई है, जिसे मायावती ने वोट के लिए एक ‘राजनीतिक नाटकबाज़ी’ करार दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक के बाद एक पोस्ट कर सपा के इतिहास और उसकी नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सपा का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से ही दलित, पिछड़ा वर्ग और बहुजन समाज के महापुरुषों के प्रति अनादर का रहा है।
जिलों और संस्थानों के नाम बदलने का आरोप
मायावती ने अखिलेश यादव का नाम लेकर सीधे तौर पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी सरकार के दौरान बसपा सरकार द्वारा बहुजन नायकों के सम्मान में रखे गए नामों को बदल दिया था। उन्होंने लिखा कि जब बसपा ने कासगंज को जिला मुख्यालय का सम्मान देते हुए ‘कांशीराम नगर’ नाम से नया जिला बनाया, तो यह अखिलेश यादव को पसंद नहीं आया।
“यह वर्तमान सपा मुखिया अखिलेश यादव के भी गले के नीचे से नहीं उतरा जिसे फिर सपा ने अपनी सरकार बनते ही अपनी घोर जातिवादी व द्वेषपूर्ण नीति एवं दलित विरोधी रवैया अपनाते हुये अन्य ज़िलों व संस्थानों आदि के नामों की तरह इसका नाम भी बदल दिया, जो कि बहुजन समाज के साथ विश्वासघात नहीं तो और क्या है?” — मायावती, बसपा अध्यक्ष
उन्होंने आगे कहा कि इसी तरह वाराणसी के पास भदोही में संत रविदास के नाम पर बनाए गए ‘संत रविदास नगर’ जिले का नाम भी सपा सरकार ने बदल दिया था। मायावती ने लखनऊ में कांशीराम के नाम पर बनी उर्दू-फारसी अरबी यूनिवर्सिटी और सहारनपुर में एक सरकारी अस्पताल का नाम बदलने का भी आरोप सपा सरकार पर लगाया।
गेस्ट हाउस कांड से लेकर बीजेपी को मदद तक के आरोप
मायावती ने 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का भी जिक्र किया, जब सपा सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ था। उन्होंने कहा कि सपा का दलित और पिछड़ा वर्ग विरोधी रवैया इतिहास में दर्ज है।
बसपा सुप्रीमो ने यह भी आरोप लगाया कि सपा के भड़काऊ आचरण के कारण ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को राजनीतिक रूप से मजबूत होने का मौका मिला। उन्होंने कहा, “इस प्रकार सपा व भाजपा दोनों एक-दूसरे की ज़रूरत बनकर यहाँ जातिवादी व साम्प्रदायिक राजनीति करते रहे और जिसका परिणाम है यूपी में भाजपा का राज।”
अंत में, उन्होंने सवाल उठाया कि सपा ने मान्यवर कांशीराम के निधन के बाद एक दिन का राजकीय शोक भी क्यों घोषित नहीं किया था? उन्होंने बहुजन समाज के लोगों से सपा के इन कृत्यों को ध्यान में रखकर सावधान रहने की अपील की।






