समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की 23 महीने बाद सीतापुर जेल से रिहाई के साथ ही उनके सियासी भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। 18 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद मंगलवार को उनकी रिहाई हुई। इस बीच, उनकी पत्नी डॉ. तंजीम फातिमा की बसपा प्रमुख मायावती से कथित मुलाकात की चर्चाओं ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। हालांकि, सपा और बसपा दोनों के नेता इस पर चुप्पी साधे हुए हैं और सभी की नजर आजम के अगले कदम पर टिकी है।
आजम खान पर करीब 96 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से 12 का फैसला हो चुका है –पांच में सजा और सात में बरी। 59 मामले सेशन कोर्ट और 19 मजिस्ट्रेट कोर्ट में लंबित हैं। 2023 में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में सात साल की सजा के बाद उन्हें, उनकी पत्नी और बेटे अब्दुल्ला को जेल जाना पड़ा था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आजम का अगला कदम उनके स्वास्थ्य और परिवार की रणनीति पर निर्भर करेगा, लेकिन मायावती से मुलाकात की अफवाहों को उनके नजदीकी खारिज करते हैं, दावा करते हुए कि तंजीम फातिमा कई महीनों से दिल्ली नहीं गईं।
सपा और आजम खान के बीच तल्खी?
सपा और आजम खान के बीच तल्खी की खबरें भी चर्चा में हैं। लोकसभा चुनाव में रामपुर सीट पर अखिलेश यादव को चुनाव लड़ने का सुझाव और मुरादाबाद से रुचिवीरा को टिकट देने की सिफारिश को अखिलेश ने ठुकरा दिया था। इसके बाद आजम के समर्थकों ने रामपुर में चुनाव बहिष्कार की घोषणा की थी। अखिलेश ने आजम की पसंद को नजरअंदाज कर मौलाना मोहिब्बुल्लाह नदवी को रामपुर से उम्मीदवार बनाया। इस खींचतान ने सपा के भीतर तनाव को उजागर किया, जिससे आजम के बसपा में जाने की अटकलें और तेज हुईं।
सपा के संस्थापक सदस्य हैं आजम खान
हालांकि, सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने दावा किया कि आजम सपा के संस्थापक सदस्य हैं और पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। उन्होंने मायावती से मुलाकात की खबरों को निराधार बताया। दूसरी ओर, बसपा और तंजीम फातिमा की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि आजम का भविष्य सपा में ही है, लेकिन लंबित मुकदमों और सियासी समीकरणों के बीच उनकी राह आसान नहीं होगी।





