प्रयागराज में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्षी नेताओं पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। दरअसल उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने “सत्ता की मलाई खाकर” अपने राज्य को बर्बाद कर दिया है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया है कि जिस पश्चिम बंगाल की तुलना एक समय महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्यों से की जाती थी, वह आज बिहार से भी पीछे रह गया है, जिसे कभी पिछड़ा राज्य माना जाता था।

दरअसल प्रयागराज में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए केशव मौर्य ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि देश में राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव सत्ता से बाहर हैं, इसलिए उनमें बौखलाहट साफ दिखाई दे रही है। मौर्य ने यह भी कहा है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी भी इसलिए बौखलाई हुई हैं, क्योंकि उन्हें यह आभास हो गया है कि इस बार उनकी सत्ता वापस नहीं आने वाली है। यह बयान ऐसे समय आया है जब कई राज्यों में चुनावी माहौल गर्म है और राजनीतिक दल एक-दूसरे पर लगातार आरोप लगा रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की स्थिति पर केशव मौर्य के आरोप

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने ममता बनर्जी के शासन को पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है, “ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता की मलाई खाई है और राज्य को बर्बाद कर दिया है।” उनके इस बयान का मतलब भ्रष्टाचार, खराब प्रशासन और जनहित के कामों की अनदेखी से है, जिससे राज्य के विकास पर असर पड़ा है। मौर्य ने कहा है कि विकास के बजाय व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता दी गई है, जिससे आम जनता को नुकसान हुआ है।

मौर्य ने पश्चिम बंगाल की वर्तमान स्थिति की तुलना उसके पुराने समय से भी की है। उन्होंने कहा है कि एक समय ऐसा था जब पश्चिम बंगाल की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को देखते हुए उसकी तुलना महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्यों से की जाती थी। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल देश के पिछड़े राज्यों में शामिल हो गया है। इसके लिए उन्होंने पहले की कम्युनिस्ट सरकार और पिछले करीब पंद्रह साल से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस सरकार दोनों को जिम्मेदार ठहराया है। उनके अनुसार इन सरकारों की नीतियों के कारण राज्य विकास की राह से भटक गया है।

मौर्य ने बिहार का उदाहरण भी दिया है, जिसे पहले आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा राज्य माना जाता था। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने कई क्षेत्रों में प्रगति की है और अब वह पश्चिम बंगाल से आगे निकलता दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार यह तुलना पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति को दिखाती है और ममता सरकार की नीतियों पर सवाल उठाती है।

अखिलेश यादव के शासनकाल पर निशाना

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि अखिलेश यादव के शासनकाल में उत्तर प्रदेश का समग्र विकास नहीं हुआ है। मौर्य के अनुसार उस समय सरकार ने केवल कुछ क्षेत्रों या वर्गों को लाभ पहुंचाने पर ध्यान दिया था, जिससे प्रदेश के बाकी हिस्सों में लोगों को उपेक्षा महसूस हुई थी।

इसी कारण को उन्होंने साल 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार का बड़ा कारण बताया है। मौर्य ने कहा है कि प्रदेश की जनता ने सपा सरकार के कामकाज को देखा था और मौका मिलने पर उन्होंने अखिलेश यादव को सत्ता से बाहर कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा है कि 2017 के बाद से अखिलेश यादव और उनकी पार्टी लगातार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही है। मौर्य के अनुसार उत्तर प्रदेश की जनता अब समाजवादी पार्टी के चरित्र को समझ चुकी है और दोबारा उन्हें मौका देने के पक्ष में नहीं है।

सपा सरकार में कानून व्यवस्था पर आरोप

केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी की पिछली सरकारों पर कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि जब सपा सत्ता में थी, तब उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब थी। उस समय महिलाएं और व्यापारी खुद को असुरक्षित महसूस करते थे और प्रदेश में डर का माहौल बना हुआ था। उनके अनुसार व्यापारियों को रंगदारी और लूटपाट जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता था और महिलाओं के खिलाफ अपराध भी बढ़े थे।

मौर्य ने कहा है कि उस समय प्रदेश में पलायन की स्थिति बन गई थी। कई व्यापारी और परिवार दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हुए थे, जिससे प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा था। उनके अनुसार यह स्थिति सपा सरकार की प्रशासनिक कमजोरियों को दिखाती थी।

डिप्टी सीएम ने यह भी आरोप लगाया है कि सपा सरकार के समय प्रदेश में अराजकता का माहौल था। उन्होंने कहा है कि उस दौर में उत्तर प्रदेश की पहचान दंगा प्रभावित प्रदेश के रूप में बन गई थी, जहां छोटी-छोटी घटनाओं पर सांप्रदायिक तनाव बढ़ जाता था और सरकार उसे नियंत्रित नहीं कर पाती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि उस समय राम भक्तों पर अत्याचार हुए थे और सरकार इस मामले में निष्पक्ष नहीं रही थी।