अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सुप्रीम कोर्ट में CBI की अगुवाई में जांच की मांग को लेकर नई याचिका दाखिल, पढ़ें खबर

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण हेतु एकत्र समर्पण निधि में कथित अनियमितताओं का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा है, जहां CBI जांच की मांग की गई है।
Ram Mandir donation theft case Supreme Court hearing

Ram Mandir donation theft case Supreme Court hearing

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण हेतु एकत्र समर्पण निधि में कथित अनियमितताओं का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज तक जा पहुंचा है, जहां एक नई याचिका दायर कर इस संवेदनशील प्रकरण की गहन जांच की मांग की गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ ही दिन पूर्व इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इसी विषय पर दायर एक अन्य याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए उसे खारिज कर दिया था। दान में कथित हेराफेरी और पारदर्शिता के अभाव से जुड़े ये आरोप देश भर के करोड़ों रामभक्तों की आस्था और विश्वास से सीधे तौर पर जुड़े हैं, जिन्होंने अतुलनीय उत्साह और जूनून के साथ मंदिर निर्माण में अपना योगदान दिया है।

सर्वोच्च न्यायालय में दायर नवीनतम याचिका में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान में कथित अनियमितताओं और गबन की विस्तृत जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने विशेष रूप से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आग्रह किया है। इसके अतिरिक्त, मामले में तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने और सभी संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या सबूतों को नष्ट किए जाने से रोका जा सके। याचिका में ट्रस्ट के धन और संपत्ति के प्रबंधन के लिए एक मजबूत ऑडिट और निगरानी प्रणाली स्थापित करने की भी मांग की गई है, जिससे भविष्य में ऐसी किसी भी अनियमितता की संभावना को समाप्त किया जा सके और पारदर्शिता सुनिश्चित हो।

हाईकोर्ट तत्काल सुनवाई से कर चुका है इनकार

उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण की तात्कालिक सुनवाई से इलाहाबाद उच्च न्यायालय पहले ही इनकार कर चुका है। मोहित अशोक नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका में राम मंदिर दान चोरी मामले में तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई गई थी, जिसे उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि न्यायालय में पहले से ही बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। मौखिक रूप से न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले का संज्ञान ले लिया है, अतः इस स्तर पर तत्काल सुनवाई की कोई आवश्यकता प्रतीत नहीं होती। उच्च न्यायालय के इस निर्णय के उपरांत अब याचिकाकर्ताओं ने न्याय और सच्चाई की तलाश में सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है।

अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी पहले भी उठा चुके हैं दान प्रबंधन का मुद्दा

यह पहली बार नहीं है जब राम मंदिर के लिए एकत्र दान के प्रबंधन को लेकर कानूनी प्रश्न उठाए गए हैं। इससे पहले भी अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की जा चुकी है। उस याचिका में मंदिर को प्राप्त कुल दान, इन निधियों को कैसे और कहाँ जमा किया गया, इसकी विस्तृत जानकारी के लिए एक फोरेंसिक ऑडिट की मांग की गई थी। अधिवक्ता गोस्वामी ने अपनी याचिका में दृढ़ता से कहा था कि दान से संबंधित सभी रिकॉर्ड, विशेषकर सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेज और डिजिटल सबूत, सुरक्षित रखे जाने चाहिए, क्योंकि वे किसी भी संभावित जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में कार्य करेंगे।

याचिकाओं में एक केंद्रीय बिंदु यह उभरा है कि देवता के नाम पर दिया गया दान या चढ़ावा वस्तुतः ट्रस्ट की संपत्ति है, और इसलिए, इन योगदानों की गिनती और प्रबंधन की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता अनिवार्य है। यह केवल कानूनी आवश्यकता ही नहीं, अपितु उन करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान भी है जिन्होंने अपनी श्रद्धा और परिश्रम की कमाई मंदिर निर्माण के लिए समर्पित की है। इन याचिकाओं के माध्यम से मांग की गई है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में मिले सभी चढ़ावों से संबंधित जानकारी, साथ ही संबंधित सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को पूर्णतः सुरक्षित रखा जाए, ताकि हर एक पैसे का हिसाब सुनिश्चित हो सके और किसी भी प्रकार के संदेह के लिए कोई गुंजाइश न बचे। यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि मंदिर निर्माण का पवित्र कार्य किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता के आरोपों से मुक्त रहे और जनता का विश्वास अक्षुण्ण बना रहे। इन कानूनी प्रयासों का उद्देश्य केवल कथित अनियमितताओं की जांच करना ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली स्थापित करना भी है।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
Shyam Dwivedi

7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi →
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