संभल को मिला ‘कल्कि धाम’ का दर्जा, सीएम योगी ने की बड़ी घोषणाएं; 659 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास

सीएम योगी ने सम्भल को भगवान विष्णु के अंतिम अवतार की भूमि बताते हुए इसे ‘कल्कि धाम’ के रूप में विकसित करने का ऐलान किया।
संभल को मिला ‘कल्कि धाम’ का दर्जा, सीएम योगी ने की बड़ी घोषणाएं; 659 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को सम्भल के बहजोई में ऐतिहासिक घोषणाएं करते हुए जिले को विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई सौगात दी। उन्होंने सम्भल को भगवान विष्णु के अंतिम अवतार की भूमि बताते हुए इसे ‘कल्कि धाम’ के रूप में विकसित करने का ऐलान किया।

सीएम योगी ने कहा,

“जब काशी और अयोध्या अपने गौरव को फिर से प्राप्त कर सकते हैं, तो सम्भल क्यों नहीं?”

उन्होंने बहजोई में नवीन पुलिस लाइन का निरीक्षण करने के बाद पूजन-अर्चन कर जिला मुख्यालय भवन का शिलान्यास किया। इसके बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सम्भल को 14 साल बाद मिला जिला मुख्यालय का तोहफा दिया।

222 परियोजनाओं की सौगात

मुख्यमंत्री ने रिमोट के ज़रिए 659 करोड़ रुपये की 222 परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। साथ ही सम्भल को जिला मुख्यालय से बेहतर जोड़ने के लिए फोरलेन सड़क निर्माण की घोषणा भी की।

विरासत और विकास को जोड़ा

सीएम योगी ने कहा कि सम्भल का उल्लेख श्रीमद्भागवत, स्कंद पुराण और विष्णु पुराण में हुआ है। यहां तीर्थ, कूप और परिक्रमा मार्गों का पुनरुद्धार कर इसे आध्यात्मिक पहचान दिलाई जाएगी।
उन्होंने कहा,

“जैसे काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर और अयोध्या में श्रीराम मंदिर बना, वैसे ही सम्भल की भी पहचान बनेगी। हम विकास को विरासत से जोड़ रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने सम्भल में पहले भड़की हिंसा का ज़िक्र करते हुए चेतावनी दी कि जो लोग सम्भल को दंगों की आग में झोंकते थे, उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

एकीकृत जिला कार्यालय का ऐलान

सीएम ने घोषणा की कि 80 एकड़ भूमि पर एक इंटीग्रेटेड जिला कार्यालय परिसर बनेगा, जहां सभी जरूरी विभाग—राजस्व, स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस आदि एक ही स्थान पर मौजूद होंगे। पुलिस लाइन के निर्माण के लिए 288 करोड़ रुपये की स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी है।

सीएम योगी ने पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सम्भल की धार्मिक विरासत को दबाने और इसे दंगे में झोंकने का काम किया। हम वोट बैंक के लिए नहीं, विरासत के सम्मान और विकास के लिए आए हैं।

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