वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट और अहिल्याबाई घाट पर विकास कार्यों के दौरान कथित तौर पर मंदिरों को तोड़े जाने का विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले की जमीनी हकीकत जानने के लिए वाराणसी जा रहे समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस प्रशासन ने बीच रास्ते में ही रोक दिया। बलिया से सांसद सनातन पांडेय इस डेलिगेशन का हिस्सा थे, जिन्हें गाजीपुर पुलिस ने बिरनो टोल प्लाजा पर रोक लिया।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रशासन के रवैये से नाराज सांसद सनातन पांडेय और उनके समर्थकों ने नेशनल हाईवे पर ही धरना शुरू कर दिया। सपा कार्यकर्ताओं ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बिरनो टोल प्लाजा पर हाईवोल्टेज ड्रामा
दरअसल, समाजवादी पार्टी ने वाराणसी के घाटों पर हो रहे निर्माण और तोफोड़ को लेकर एक जांच दल गठित किया था। यह दल मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेने वाला था। बलिया सांसद सनातन पांडेय अपने काफिले के साथ इसी उद्देश्य से वाराणसी की ओर बढ़ रहे थे। जैसे ही उनका काफिला गाजीपुर के बिरनो टोल प्लाजा के पास पहुंचा, वहां पहले से मौजूद पुलिस बल ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
सांसद का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से यात्रा कर रहे थे और गाजीपुर या बलिया प्रशासन का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए था, फिर भी उन्हें रोका गया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने हाईवे को जाम कर अपना विरोध दर्ज कराया।
‘हम आतंकवादी नहीं हैं’
धरने पर बैठे सांसद सनातन पांडेय ने प्रशासन की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने जा रहे थे।
“ना ही हम आतंकवादी हैं और ना ही किसी से डरने वाले हैं। हम लोग कानून और संविधान को मानते हैं, इसलिए हम लोकतांत्रिक तरीके से यहां बैठे हुए हैं। हम सपा के लोग हैं और आगे तो जाएंगे ही।” — सनातन पांडेय, सांसद (बलिया)
सरकार पर सच छिपाने का आरोप
सपा सांसद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार मणिकर्णिका और अहिल्याबाई घाट की हकीकत जनता के सामने नहीं आने देना चाहती। पांडेय ने कहा कि प्रशासन को डर है कि अगर समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल वहां पहुंचा, तो कथित विकास के नाम पर तोड़े गए मंदिरों की सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा नफरत की राजनीति कर रही है और कुरीतियां फैला रही है। इसी सच को उजागर करने के लिए डेलिगेशन वाराणसी जा रहा था, लेकिन सरकार के इशारे पर पुलिस ने उन्हें रोकने का काम किया है। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने पूर्वांचल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।





