
उत्तर प्रदेश की सियासत में स्वामी प्रसाद मौर्य एक बार फिर सुर्खियों में हैं। बहुजन समाज पार्टी छोड़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी का दामन थामने वाले मौर्य अब अपनी जनता पार्टी बनाकर सियासी जमीन तलाश रहे हैं। सपा और बीजेपी पर तीखे हमले करते हुए वह बसपा प्रमुख मायावती के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं, जिससे उनके बसपा में वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में कहा कि यदि मायावती बाबासाहेब आंबेडकर के मिशन और कांशीराम के रास्ते पर चलेंगी, तो वह बसपा के साथ फिर से जुड़ने को तैयार हैं। यह बयान उनके बसपा में ‘घर वापसी’ की संभावना को दर्शाता है। पहले मायावती पर गंभीर आरोप लगाने वाले मौर्य अब उनकी तारीफ करते नजर आ रहे हैं, जिसे सियासी हलकों में उनकी वापसी की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सियासी तौर पर प्रभावशाली स्थिति नहीं
सपा छोड़ने के बाद से स्वामी प्रसाद मौर्य सियासी तौर पर प्रभावशाली स्थिति हासिल नहीं कर पाए हैं। उनकी परंपरागत सीट ऊंचाहार में बाबू सिंह कुशवाहा की बढ़ती सक्रियता ने मौर्य समाज को दो हिस्सों में बांट दिया है। सपा और बीजेपी को एक जैसा बताते हुए मौर्य इन दोनों पार्टियों पर गुंडाराज और जंगलराज का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन बसपा के प्रति उनकी चुप्पी और मायावती की तारीफ साफ तौर पर उनके इरादों को जाहिर कर रही है।
पुराने आक्रामक बयानों का जिक्र
हालांकि, मायावती का रुख अभी स्पष्ट नहीं है। बसपा सूत्रों के मुताबिक, स्वामी प्रसाद के पुराने आक्रामक बयानों और सनातन धर्म पर उनकी टिप्पणियों से मायावती नाराज हैं। उनकी बेटी संघमित्रा मौर्य की मायावती से मुलाकात के बावजूद बसपा से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है। ऐसे में मौर्य का बसपा में वापसी का रास्ता कितना आसान होगा, यह यूपी की सियासत में 2027 के चुनाव से पहले देखने वाली बात होगी।
