होली से ठीक पहले बरेली में आस्था, परंपरा और उत्सव एक साथ सड़कों पर दिखे। शहर में 166वीं बार ऐतिहासिक राम बरात निकाली गई और सुबह से ही इसके मार्ग पर भारी भीड़ जुटने लगी। ब्रह्मपुरी स्थित नृसिंह मंदिर से करीब 10 बजे पूजा-पाठ के बाद यात्रा शुरू हुई तो जय श्रीराम के उद्घोष के साथ माहौल पूरी तरह उत्सवी हो गया।
इस बार की बरात का समय सामान्य वर्षों से अलग रहा। चंद्र ग्रहण की वजह से राम बरात होली से एक दिन पहले निकाली गई। यही बदलाव इस आयोजन की सबसे चर्चित बात रहा, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग यह जानना चाह रहे थे कि परंपरागत कार्यक्रम की तिथि क्यों बदली गई।
रथ पर रघुवर दूल्हे के रूप में विराजमान रहे। उनके साथ भ्राता लक्ष्मण और गुरु विश्वामित्र भी सवार थे। जैसे-जैसे रथ आगे बढ़ा, वैसा-वैसा जुलूस का दायरा फैलता गया और शामिल लोगों की संख्या भी बढ़ती गई। बरात मार्ग पर रंगों की उपस्थिति लगातार गहराती रही।
हुरियारों की टोलियां, रंग और फूलों की बारिश
राम बरात में बरातियों के रूप में शामिल हुरियारों ने अलग-अलग टोलियों में मोर्चाबंदी की। फूलों की बारिश के बीच रंग खेला गया और हवा में उड़ते गुलाल ने पूरे रास्ते को रंगीन बना दिया। कई जगहों पर गुब्बारों से रंग बरसते दिखे। सतरंगी चेहरों और जयकारों के बीच जुलूस आगे बढ़ता रहा। आयोजन का स्वरूप धार्मिक रहा, लेकिन उसमें होली के पारंपरिक उत्साह की स्पष्ट झलक भी दिखाई दी।
यह भीड़ केवल एक चल समारोह की नहीं थी। इसमें परिवार, युवाओं की टोलियां और बाहर से आए दर्शक भी शामिल रहे। आसपास के इलाकों से आए लोगों ने भी इस बरात को देखने के लिए प्रमुख मार्गों पर पहले से जगह ली। स्थानीय लोगों के अनुसार बरेली की राम बरात आसपास के जिलों में भी लंबे समय से प्रसिद्ध है।
शहरभर में स्वागत, झांकियां आकर्षण का केंद्र
बरात मार्ग पर अलग-अलग स्थानों पर शहरवासियों ने फूल और रंग बरसाकर स्वागत किया। रथ के साथ चल रहीं झांकियां इस बार भी आकर्षण का मुख्य केंद्र बनीं। कई पड़ावों पर लोग जुलूस के गुजरने का इंतजार करते रहे और स्वागत की तैयारियां पहले से की गई थीं।
बढ़ती भीड़ और लंबा मार्ग देखते हुए पानी की व्यवस्था भी व्यापक रखी गई। राम बरात के दौरान पानी की कमी न हो, इसके लिए 15 स्थानों पर 17 टैंकर लगाए गए। भीड़ प्रबंधन के लिहाज से यह व्यवस्था महत्वपूर्ण रही, क्योंकि रंगोत्सव और शोभायात्रा एक साथ होने पर लोगों की आवाजाही सामान्य दिनों से कहीं अधिक रहती है।
सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय तैनाती
शोभायात्रा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पहले से तैयार की गई थी। ड्यूटी में 5 सीओ, 5 थाना प्रभारी, 7 इंस्पेक्टर, 108 हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल और 16 महिला कांस्टेबल तैनात किए गए। इसके साथ एक कंपनी पीएसी भी लगाई गई।
प्रशासन ने रूट पर केवल बल तैनात करने तक खुद को सीमित नहीं रखा। राम बरात से पहले रविवार रात पुलिस अधिकारियों ने पूरे मार्ग का जायजा लिया और लोगों से संवाद भी किया। इसका उद्देश्य रूट पर भीड़ की दिशा, संवेदनशील बिंदुओं और स्थानीय अपेक्षाओं को पहले से समझना था ताकि आयोजन शांतिपूर्वक पूरा हो सके।
ऐतिहासिक पहचान के कारण इस राम बरात की अलग प्रतिष्ठा है। स्थानीय स्तर पर इसे अनूठी परंपरा माना जाता है और इसे विश्व धरोहरों में शामिल बताया जाता है। यही वजह रही कि इस वर्ष तिथि परिवर्तन के बावजूद भीड़ में कोई कमी नहीं दिखी। धार्मिक स्वर, रंगोत्सव और सुव्यवस्थित प्रबंधन के साथ बरेली की यह परंपरा एक बार फिर बड़े पैमाने पर संपन्न हुई।





