उत्तर प्रदेश की पावन धरा बागपत, जो अपने पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए युगों-युगों से जानी जाती है, आज एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ओजस्वी उद्बोधन की साक्षी बनी। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जिस प्रकार सनातन धर्म की अजेय शक्ति और भारत की सांस्कृतिक दृढ़ता का उद्घोष किया, वह समस्त राष्ट्र के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में संदेश दिया कि जिन्होंने सनातन की आस्था को खंडित करने का कुत्सित प्रयास किया, वे सभी विदेशी आक्रांता इतिहास के पन्नों से स्वयं मिट गए, उनका नामोनिशान तक नहीं बचा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में आक्रांताओं पर सीधा और तीखा प्रहार किया, जो उनके दृढ़ संकल्प और सनातन के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को दर्शाता है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जिन विदेशी शक्तियों ने मंदिरों, मठों और तीर्थ स्थलों को नष्ट करने का दुस्साहस किया था, वे आज स्वयं मिट्टी में मिल चुके हैं। इसके विपरीत, सनातन की परंपरा और उसकी अविनाशी आस्था आज भी पहले से कहीं अधिक मजबूती और भव्यता के साथ अटल खड़ी है। यह भारतवर्ष ही वह अद्वितीय राष्ट्र है जिसने सदियों तक अनगिनत विदेशी आक्रांताओं के भीषण हमलों का सामना किया और हर विषम परिस्थिति में अपनी दिव्य संस्कृति और अगाध आस्था की सदैव रक्षा की।
उन्होंने जिस प्रकार इस शाश्वत सत्य को रेखांकित किया कि जिन आक्रांताओं ने सनातन के प्रतीक मंदिरों और तीर्थ स्थलों को विखंडित करने का प्रयास किया था, वही पावन तीर्थ स्थल आज फिर से अपनी भव्य पुनर्प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुके हैं, वह एक ऐतिहासिक विजय का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने बल देते हुए कहा कि यह सनातन धर्म की विजय है, जो काल के हर प्रहार को सहकर भी अक्षुण्ण बना रहा। आक्रांताओं का नामोनिशान तक इतिहास में नहीं बचा, यह इस बात का प्रमाण है कि सत्य और धर्म की विजय सुनिश्चित है।
मुख्यमंत्री ने बताया बागपत का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व
मुख्यमंत्री ने बागपत की धरती के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जिस महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने कौरवों से पांडवों के लिए मात्र पांच गांव मांगे थे, उनमें बागपत भी सम्मिलित था। आज वही बागपत एक गौरवशाली जनपद के रूप में देश और प्रदेश में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री ने स्मरण करते हुए कहा कि कुछ वर्ष पूर्व जब वे इस स्थान पर आए थे, तब यह अपेक्षाकृत छोटा था, किंतु यहां के स्थानीय लोगों और पूज्य संतों के अथक प्रयासों से इसे एक भव्य तीर्थ के रूप में विकसित किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस पुनीत कार्य के लिए क्षेत्र के समस्त लोगों और संतों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया, जो अपनी संस्कृति और विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने स्वतंत्र भारत के किसानों के मसीहा और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह की कर्मभूमि का भी ससम्मान उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चौधरी चरणसिंह का जन्म इसी पावन क्षेत्र में हुआ था और उनकी कर्मभूमि होने के नाते बागपत ने देश और विश्व में अपनी एक विशेष ख्याति अर्जित की है। मुख्यमंत्री ने जिस प्रकार यह तथ्य प्रस्तुत किया कि इस धरती से अनेक महान व्यक्तित्वों ने जन्म लिया है, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम रोशन किया है, वह बागपत के समृद्ध इतिहास और उसकी उर्वरा शक्ति का परिचायक है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि यहां की गौरवशाली विरासत और तीव्र विकास दोनों साथ-साथ प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं, जो नए उत्तर प्रदेश की पहचान बन रहा है।






