
भारत पर अमेरिका द्वारा भारी-भरकम टैरिफ लगाने को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने केंद्र सरकार को विदेश नीति के मोर्चे पर घेरते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
केंद्र सरकार विदेश नीति में फेल
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर केंद्र सरकार की विदेश नीति को पूरी तरह विफल बताया। उन्होंने कहा कि भारत का अमेरिका से पुराना रिश्ता रहा है, फिर भी यह स्थिति क्यों आई? उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं सरकार ने कुछ कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए फैसले तो नहीं लिए?
अखिलेश ने कहा कि चौतरफा पाबंदियों और फैसलों की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था संकट में है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को किसानों, कारोबारियों और युवाओं के हित में काम करना चाहिए था। सरकार ने जो वादे किए थे, वे सब झूठे निकले। महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है, किसान बर्बाद हो रहे हैं।
ग का मतलब गरीब है
अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘पीडीए पाठशाला’ बयान पर तंज कसते हुए कहा, “जो जैसा पढ़ा होगा, वहीं बोलेगा। समाजवादियों के लिए ‘ग’ का मतलब गरीब है, हो सकता है भाजपा के लिए ‘ग’ फॉर गधा हो। अगर मुख्यमंत्री वाकई पढ़ाई चाहते, तो स्कूल बंद नहीं करते।”
उन्होंने दावा किया कि समाजवादी सरकार में स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और बिजली घर बनाए गए। लेकिन मौजूदा मुख्यमंत्री तो “श्री इन्टू सिक्स सिक्सटी थर्मल सुपर पावर प्लांट” का नाम तक ठीक से नहीं बोल पाए।
भारत के साथ विश्वासघात
बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अमेरिका के टैरिफ को ‘अन्यायपूर्ण, अनुचित और अविवेकी’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत की जनता इस फैसले को मित्र राष्ट्र द्वारा किया गया विश्वासघात मान रही है। ब्राजील की तरह भारत पर भी कुल मिलाकर 50 फीसदी का टैरिफ लगाकर अमेरिका ने भारत को झटका देने की कोशिश की है।
ब्रिक्स देश ब्राज़ील की तरह ही भारत पर भी कुल मिलाकर 50 प्रतिशत का भारी भरकम टैरिफ (शुल्क) लगाकर अमेरिका ने जो भारत को आघात पहुँचाने का प्रयास किया है, उसे भारत सरकार ने अपने संयमित बयान में ’अनुचित, अन्यायपूर्ण व अविवेकी’ बताया है, किन्तु देश की जनता डोनाल्ड ट्रम्प का ’मित्र’…
— Mayawati (@Mayawati) August 7, 2025
मायावती ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए पूरे देश को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि संसद के मौजूदा सत्र में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
