गाजियाबाद। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी (सपा) और अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। महर्षि कश्यप जयंती के अवसर पर गाजियाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में मौर्य ने साफ तौर पर कहा कि सपा सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा उत्पीड़न पिछड़े और दलित समुदायों का हुआ था। उन्होंने 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भी भाजपा की रणनीति का खुलासा किया, जिसमें उन्होंने सपा को दोबारा उसके पारंपरिक गढ़ सैफई पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। यह बयान भाजपा की ओर से विपक्ष पर एक सीधा राजनीतिक वार माना जा रहा है।
मौर्य ने सपा सरकार की कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल
मौर्य ने अपने संबोधन में पिछली सपा सरकार के कार्यकाल की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब समाजवादी पार्टी सत्ता में थी, तब पश्चिमी उत्तर प्रदेश का इलाका लगातार दंगों की चपेट में रहता था। उन्होंने मौजूदा भाजपा सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए दावा किया कि प्रदेश को पूरी तरह से दंगा मुक्त कर दिया गया है, जिससे राज्य में शांति और सद्भाव का माहौल कायम हुआ है। उपमुख्यमंत्री के अनुसार, इस बदलाव से कानून व्यवस्था मजबूत हुई है और आम लोगों में सुरक्षा का भाव बढ़ा है।
उपमुख्यमंत्री ने सपा और कांग्रेस पर लगाया गंभीर आरोप
उपमुख्यमंत्री ने 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुछ दुष्प्रचार के कारण सपा और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों को उम्मीद से ज्यादा वोट मिल गए। मौर्य ने आरोप लगाया कि इन नतीजों से उत्साहित होकर विपक्ष के नेता अब आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करना शुरू कर चुके हैं। उनका इशारा संभवतः विपक्षी नेताओं द्वारा चुनाव परिणाम के बाद दिए गए उन बयानों और टिप्पणियों की ओर था, जिन्हें सत्ताधारी भाजपा गैर-जिम्मेदाराना और आपत्तिजनक मानती है। मौर्य ने विपक्षी दलों पर जीत के बाद अहंकार में आने का भी अप्रत्यक्ष आरोप लगाया, जिससे राजनीतिक माहौल में तीखी बयानबाजी और बढ़ गई है।
केशव प्रसाद मौर्य ने भाजपा के आगामी राजनीतिक एजेंडे को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य अब 2027 के विधानसभा चुनाव में 2017 के अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन को दोहराना है। 2017 में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। मौर्य ने इस बार के लक्ष्य को और स्पष्ट करते हुए कहा कि भाजपा सपा को ‘सैफई’ पहुंचाएगी। यह बयान सीधे तौर पर अखिलेश यादव और उनके परिवार के राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती देता है, जिसका पारंपरिक गढ़ इटावा जिले का सैफई गांव है। मौर्य के इस बयान से साफ है कि भाजपा 2027 में समाजवादी पार्टी को कोई मौका नहीं देना चाहती और उसे उसके पारंपरिक मजबूत क्षेत्रों में भी कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है। यह राजनीतिक हुंकार आगामी चुनावों के लिए भाजपा की आक्रामक रणनीति का एक अहम हिस्सा है।
कश्यप और निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग
इसी कार्यक्रम के दौरान, प्रदेश के राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक मांग उठाई। उन्होंने महर्षि कश्यप जयंती के मंच से कश्यप और निषाद समाज को अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में शामिल करने की वकालत की। नरेंद्र कश्यप ने जोर देकर कहा कि इन समुदायों को लंबे समय से इस मांग का इंतजार है और उन्हें उचित प्रतिनिधित्व के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और अन्य सरकारी योजनाओं में आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। यह मांग उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा रही है, जिसे विभिन्न दल इन समुदायों का समर्थन हासिल करने के लिए समय-समय पर उठाते रहे हैं। अनुसूचित जाति में शामिल होने से इन समुदायों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान में मदद मिलने की उम्मीद है।
राज्य मंत्री की यह मांग भाजपा सरकार के लिए एक बड़ा निर्णय लेने की चुनौती पेश करती है। अनुसूचित जाति की सूची में किसी भी समुदाय को शामिल करने का अधिकार और प्रक्रिया केंद्र सरकार के दायरे में आती है, और इसके लिए संसद की मंजूरी आवश्यक होती है। इस तरह की मांगें अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बनती हैं, क्योंकि इससे राज्य के सामाजिक समीकरणों और आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था पर गहरा असर पड़ता है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की उपस्थिति में इस मांग का उठना इस बात का संकेत है कि भाजपा के लिए कश्यप और निषाद जैसे पिछड़े समुदायों का समर्थन कितना महत्वपूर्ण है। पार्टी इन समुदायों को अपने साथ बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, खासकर ऐसे समय में जब विपक्षी दल भी जातिगत जनगणना और सामाजिक न्याय के मुद्दों को जोर-शोर से उठा रहे हैं।
केशव प्रसाद मौर्य का यह दौरा और उनके द्वारा दिए गए बयान आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बिसात पर भाजपा की चालों को स्पष्ट करते हैं। सपा को पिछली सरकारों के दौरान के कथित उत्पीड़न, दंगों और कानून व्यवस्था की कमजोरियों के आरोपों से घेरने की कोशिश की जा रही है। भाजपा ‘दंगा-मुक्त प्रदेश’ के अपने नारे को भुनाकर कानून व्यवस्था के मुद्दे पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। वहीं, राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप की कश्यप और निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग भी जातिगत समीकरणों को साधने की एक अहम कवायद का हिस्सा है, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। इन बयानों से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और तेज होगी, जिसमें सामाजिक न्याय, जातिगत समीकरण और विकास के मुद्दे केंद्र में रहेंगे, और सभी दल मतदाताओं को रिझाने के लिए अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम करेंगे।






