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उत्तर प्रदेश में ग्राम-ऊर्जा मॉडल की शुरुआत, बायोगैस से बनेगी गांवों की रसोई गैस

Written by:Saurabh Singh
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राज्य सरकार ने इस योजना को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जोड़ा है ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए ‘ग्राम-ऊर्जा मॉडल’ की शुरुआत कर दी है। इस अभिनव पहल के तहत गांवों में घरेलू बायोगैस यूनिट्स लगाए जाएंगे। जिससे ग्रामीण महिलाएं रसोई गैस के विकल्प के तौर पर गोबर से तैयार बायोगैस का इस्तेमाल कर सकेंगी।

सरकार का दावा है कि इस योजना से ग्रामीण घरों में एलपीजी की खपत 70 फीसदी तक घटाई जा सकेगी। साथ ही निजी पशुशालाओं के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।  आवारा पशुओं की समस्या में भी कमी आने की संभावना है।

मनरेगा से जुड़कर मिलेगा व्यापक लाभ

राज्य सरकार ने इस योजना को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जोड़ा है ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। योजना के तहत हर ग्रामीण परिवार को व्यक्तिगत गोशालाएं बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इन गोशालाओं में तैयार गोबर को बायोगैस प्लांट में प्रयोग किया जाएगा, जिससे खाना पकाने के लिए स्वच्छ और सस्ती गैस तैयार होगी।

जैविक खाद से होगी आमदनी

बायोगैस प्लांट से बची हुई स्लरी को जैविक खाद के रूप में नजदीकी किसानों को बेचा जाएगा। इससे न केवल आय का एक नया स्रोत तैयार होगा, बल्कि जैविक खेती को भी प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार की योजना के अनुसार, राज्य की 43 चयनित गौशालाओं में भी बायोगैस और जैविक खाद संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। हर गौशाला से प्रति माह 50 क्विंटल तक गोबर उत्पन्न होने की उम्मीद है, जो जैविक खेती में लगे किसानों के लिए एक मूल्यवान संसाधन बन सकता है।

पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बल

उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के ओएसडी अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि ग्राम स्तर पर लगाए जा रहे ये बायोगैस यूनिट्स न केवल एलपीजी की खपत को कम करेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएंगे। यह मॉडल ग्रामीण विकास, रोजगार, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को एक साथ साधने की दिशा में सरकार की बड़ी पहल है। सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और गांव ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेंगे। इसके साथ ही किसानों को जैविक खेती से अतिरिक्त आमदनी भी हो सकेगी।

Saurabh Singh
लेखक के बारे में
राजनीति में गहरी रुचि. खबरों के विश्लेषण में तेज और राजनीतिक परिस्थितियों की समझ रखते हैं. देश-दुनिया की घटनाओं पर बारीक नजर और फिर उसे खबरों के रूप में लिखने के शौकीन हैं. View all posts by Saurabh Singh
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