Hindi News

उत्तर प्रदेश के बलिया में ‘तवायफ’ गांव का नाम बदलने की मांग तेज, जानें क्यों इस शब्द से युवाओं के रिश्ते टूट रहे और नौकरी मिलने में हो रही दिक्कत

Written by:Ankita Chourdia
Published:
बलिया जिले के रूपवार तवायफ गांव के निवासी अपने गांव के नाम में जुड़े 'तवायफ' शब्द के कारण सामाजिक तिरस्कार झेल रहे हैं। इस नाम की वजह से युवाओं के विवाह टूट रहे हैं और उन्हें नौकरी पाने में भी अपमान का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते ग्रामीणों ने अब इसका नाम बदलकर 'देवपुर' करने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश के बलिया में ‘तवायफ’ गांव का नाम बदलने की मांग तेज, जानें क्यों इस शब्द से युवाओं के रिश्ते टूट रहे और नौकरी मिलने में हो रही दिक्कत

बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक ऐसा गांव है, जिसका नाम ही उसके निवासियों के लिए एक सामाजिक कलंक बन गया है। इस गांव का नाम है- रूपवार तवायफ। सरकारी दस्तावेजों में दर्ज यह नाम आज की पीढ़ी के लिए शर्मिंदगी और अपमान का बोझ बन चुका है, जिसके चलते यहां के लोग इसे बदलने के लिए पिछले दो साल से संघर्ष कर रहे हैं।

गांव के युवाओं और महिलाओं का दर्द इस नाम से जुड़ी कड़वी हकीकत को बयां करता है। उनका कहना है कि जैसे ही कोई उनके गांव का नाम सुनता है, उनका नजरिया बदल जाता है। कई बेटियों के रिश्ते सिर्फ इसलिए टूट गए क्योंकि लड़के वालों को गांव का नाम पता चला। यह सिर्फ शादी-ब्याह तक सीमित नहीं है, बल्कि नौकरी के लिए आवेदन करने, होटल में कमरा बुक करने या किसी अनजान जगह पर अपना पहचान पत्र दिखाने पर भी उन्हें तिरछी नजरों और उपहास का सामना करना पड़ता है।

पहचान पत्र बना शर्मिंदगी का कारण

ग्रामीणों के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी और दूसरे सरकारी कागजात किसी पहचान से ज्यादा शर्मिंदगी का सबब बन गए हैं। एक ग्रामीण ने बताया, “जब हम बाहर कहीं अपना पता बताते हैं, तो लोग हंसते हैं और सवाल करते हैं। हमें यह समझाना मुश्किल हो जाता है कि हमारा उस इतिहास से कोई लेना-देना नहीं है।”

कई युवा जो बाहर रहकर पढ़ाई या नौकरी कर रहे हैं, वे अपने पते में गांव का नाम छिपाने को मजबूर हैं। वे अपने गांव की जगह पास के किसी शहर का नाम लिख देते हैं ताकि उन्हें अपमानित न होना पड़े। बच्चों के भविष्य को लेकर भी गांव वाले चिंतित हैं, उन्हें डर है कि यह नाम उनके सपनों के आड़े आ जाएगा।

अंग्रेजों के दौर से जुड़ा है नाम का इतिहास

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस गांव का यह नाम ब्रिटिश हुकूमत के समय का है। बताया जाता है कि उस दौर में अंग्रेजों ने मनोरंजन और शाही महफिलों के लिए यहां तवायफों को बसाया था। वक्त के साथ अंग्रेज चले गए, तवायफें भी नहीं रहीं, लेकिन गांव पर लगा यह ठप्पा आज भी उनकी पीढ़ियों का पीछा कर रहा है।

“हमारा मौजूदा पीढ़ी का उस अतीत से कोई संबंध नहीं है, फिर भी हम उसी पहचान का बोझ क्यों ढोएं? हम भी सम्मान की जिंदगी जीना चाहते हैं।” — एक स्थानीय निवासी

ग्रामीणों का तर्क है कि जब देश में बड़े-बड़े शहरों और सड़कों के नाम बदले जा सकते हैं, तो उनके गांव की पीड़ा को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है।

‘देवपुर’ रखने की मांग, फाइलों में अटकी प्रक्रिया

अब इस सामाजिक तिरस्कार से मुक्ति पाने के लिए गांव वालों ने एकजुट होकर प्रशासन से गुहार लगाई है। उन्होंने सर्वसम्मति से गांव का नाम ‘रूपवार तवायफ’ से बदलकर ‘देवपुर’ रखने का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए पिछले दो वर्षों से जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तक लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं।

हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी मांग पर सुनवाई तो होती है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। उनकी फाइलें बस एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर घूम रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकार और प्रशासन उनकी इस गंभीर समस्या को समझेंगे और आने वाली पीढ़ियों को इस कलंक से मुक्त करने के लिए जल्द ही गांव को एक नई पहचान देंगे।