काशी की धार्मिक गरिमा और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए वाराणसी नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब वाराणसी में मीट, मांस और मछली बाजार शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित किए जाएंगे। इस निर्णय के पश्चात शहर के भीतर अब कच्चा मीट या मछली नहीं मिलेगी। नगर निगम की बैठक में यह तय किया गया कि काशी में कोई भी मीट, मांस और मछली की दुकान संचालित नहीं होगी। इन सभी दुकानों को शहर की परिधि के बाहर ले जाया जाएगा।
वाराणसी शहर की सभी मीट-मछली की दुकानों को रामनगर, सूजाबाद, गनेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर जैसे स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। शहर से बाहर इन दुकानों को भेजने की मांग पिछले काफी समय से उठ रही थी। नगर निगम सदन में पार्षद गुलशन अली ने गत वर्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। पार्षद अली ने उस समय यह तर्क दिया था कि सावन के पवित्र महीने में मीट की दुकानें पूरे माह बंद रहती हैं, जिससे इन व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है।
काशी विश्वनाथ धाम के भव्य उद्घाटन के बाद से वाराणसी में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। दिसंबर 2021 में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ था, और तब से लेकर अब तक लगभग 29 करोड़ 80 लाख श्रद्धालु यहां दर्शन कर चुके हैं। भीषण गर्मी के मौसम के बावजूद, पिछले साठ दिनों के भीतर ही एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए हैं।
नवरात्र तक शहर से बाहर स्थानांतरित होंगी मांस की दुकानें
ऐसे में, नगर निगम का स्पष्ट मत है कि काशी की प्राचीन गलियों और धार्मिक वातावरण में कच्चे मीट और मछली की दुकानें होना उचित नहीं है। इन दुकानों से श्रद्धालुओं को असुविधा होती है, जिससे शहर की धार्मिक छवि भी प्रभावित होती है। नगर निगम ने इन दुकानों को नवरात्र तक शहर से बाहर स्थानांतरित करने की व्यापक तैयारी की है। यह कार्य आगामी नवरात्र से पहले पूरा कर लिया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है काशी विश्वनाथ
वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर का विशेष महत्व है, क्योंकि यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। पौराणिक ग्रंथों में ऐसा वर्णन मिलता है कि काशी में मृत्यु प्राप्त होने पर व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है, अर्थात उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। यही कारण है कि जीवन के अंतिम पड़ाव में कई श्रद्धालु काशी आकर अपने प्राण त्यागने की इच्छा रखते हैं।
विश्व के प्राचीन शहरों में है काशी
काशी को विश्व के सबसे प्राचीन और निरंतर बसे शहरों में से एक माना जाता है। हजारों वर्षों से यह नगर वेद, पुराण, दर्शनशास्त्र, संस्कृत अध्ययन और विभिन्न धार्मिक परंपराओं का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यह अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्वभर में विख्यात है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, नगर निगम का यह निर्णय काशी की पवित्रता और धार्मिक माहौल को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






