उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले में गिरफ्तार आरोपी प्रमोद नौटियाल को अदालत से राहत नहीं मिली है। दरअसल चमोली जिला न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। अदालत ने पुलिस की रिमांड अर्जी भी स्वीकार नहीं की। इस फैसले के बाद अब मामले की जांच न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी और एसआईटी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपनी कार्रवाई जारी रखेगी।
दरअसल यह मामला सामने आने के बाद से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। बद्रीनाथ धाम देश के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में गिना जाता है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन और चढ़ावा अर्पित करने पहुंचते हैं। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी अनियमितता की खबर प्रशासन और सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय मानी जा रही है।
एसआईटी जांच में क्या सामने आया?
चढ़ावा हेराफेरी की शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। जांच के दौरान समिति से जुड़े कर्मचारी प्रमोद नौटियाल की भूमिका संदिग्ध मिलने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। एसआईटी का कहना है कि मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, दस्तावेज और रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।
अदालत में सुनवाई के दौरान एसआईटी ने आरोपी को पुलिस रिमांड पर लेने की मांग की थी। एजेंसी का तर्क था कि कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने और वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ने के लिए आरोपी से आगे पूछताछ जरूरी है। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि आरोपी जांच में सहयोग करने को तैयार है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने रिमांड और जमानत, दोनों अर्जियां खारिज कर दीं। इसके बाद प्रमोद नौटियाल को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
अब जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी?
एसआईटी की जांच अब केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस कथित हेराफेरी में किसी अन्य व्यक्ति या कर्मचारी की भी भूमिका रही है। इसके लिए बैंक खातों, वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों की विस्तार से जांच की जा रही है। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।






