नैनीताल जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक घमासान मच गया है। कांग्रेस पार्टी ने चुनाव से ठीक पहले अपने चार जिला पंचायत सदस्यों के ‘गायब’ होने का आरोप लगाया है और इस मुद्दे को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह एक सुनियोजित अपहरण की साजिश है, ताकि चुनाव में उनकी जीत को रोका जा सके। कांग्रेस जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल ने बताया कि मतदान से ठीक पहले चार सदस्य अचानक गायब हो गए और उनके पास ऐसे प्रमाण हैं जिनसे यह साबित होता है कि उन्हें जबरन उठाया गया। इस मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें कुछ लोग कथित तौर पर कांग्रेस सदस्यों को जबरन गाड़ी में बैठाते हुए नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस ने कोर्ट में उठाई आवाज
इस मामले पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए नैनीताल के जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तुरंत पेश होने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि लापता सदस्यों को तुरंत खोजा जाए और यदि वे कहीं बंधक बनाए गए हैं तो उन्हें मुक्त कर सुरक्षित मतदान स्थल तक लाया जाए।
हर सदस्य को मिले वोट डालने का अवसर
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर जिला पंचायत सदस्य को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अधिकार है, और कोई भी ताकत उन्हें इससे वंचित नहीं कर सकती। कोर्ट ने SSP को आदेश दिया कि दस अन्य सदस्यों को पुलिस सुरक्षा में मतदान स्थल तक पहुंचाया जाए, जबकि गायब हुए पांच सदस्यों की तलाश प्राथमिकता के आधार पर की जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि गायब सदस्यों के बयान कोर्ट के समक्ष दर्ज किए जाएं, और यह पता लगाया जाए कि वे अपनी मर्जी से कहीं गए हैं या जबरन ले जाए गए हैं। इसके लिए उनके आवासों और रास्तों में लगे CCTV फुटेज की जांच भी की जाएगी।
वोटिंग में हो सकता है समय विस्तार
हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वोटिंग का समय बढ़ाया जा सकता है, लेकिन चुनाव को आज ही संपन्न कराना होगा। मामले की अगली सुनवाई आने वाले दिनों में होगी, इसमें अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएगी। फिलहाल नैनीताल जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल बेहद गर्म है। सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं। यह मामला केवल एक चुनाव का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता से जुड़ा है, जिसे लेकर जनता और राजनीतिक दल दोनों बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं।





