उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के सीधे निर्देश पर राजधानी देहरादून में आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एक विशेष अभियान ‘ऑपरेशन प्रहार’ शुरू किया गया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दीपम सेठ ने 31 मार्च 2026 को पुलिस मुख्यालय में कानून-व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की। वहीं इस बैठक में डीजीपी ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं, जिसमें उन्हें पूर्ण मुस्तैदी, सतर्कता और जवाबदेही के साथ काम करते हुए आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है।
दरअसल देहरादून में हाल ही में सामने आई संवेदनशील आपराधिक घटनाओं ने पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी। इन घटनाओं के मद्देनजर ही मुख्यमंत्री ने राजधानी में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में डीजीपी दीपम सेठ ने यह महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें वर्तमान स्थिति का आकलन किया गया है और भविष्य की रणनीति पर गहन चर्चा की गई है।
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वहीं बैठक में पुलिस प्रशासन के कई आला अधिकारी मौजूद रहे हैं। इनमें आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे, एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल और एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह प्रमुख रूप से शामिल रहे हैं। इनके अलावा अन्य संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे हैं, जिन्हें अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के तहत ‘ऑपरेशन प्रहार’ को सफल बनाने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत अधिकारियों को दिए गए कड़े निर्देश
दरअसल आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप को देहरादून की कानून-व्यवस्था की दैनिक आधार पर निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है। उन्हें हर दिन की रिपोर्ट डीजीपी को सौंपनी होगी, ताकि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और किसी भी अप्रत्याशित घटना को तुरंत नियंत्रित किया जा सके। इससे उच्च स्तर पर जवाबदेही तय होगी और जमीनी स्तर पर पुलिसिंग में सुधार आएगा।
वहीं देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल को अपने अधीनस्थ अधिकारियों को स्पष्ट कार्य सौंपने और उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधिकार क्षेत्र में प्रभावी पुलिसिंग बनी रहे। इसका सीधा मतलब यह है कि हर पुलिसकर्मी को अपनी जिम्मेदारी का अहसास हो और वह उसे गंभीरता से निभाए। लापरवाही होने पर सीधी कार्रवाई की जाएगी।
सभी क्षेत्राधिकारियों (सीओ) और थाना प्रभारियों (एसएचओ) को स्वयं फील्ड में सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है। उन्हें चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में पुलिस की दृश्यता बढ़ानी होगी और बैरियर्स पर सघन चेकिंग अभियान चलाना होगा। विशेष रूप से सुबह के समय क्षेत्राधिकारियों को पुलिस बल की उपस्थिति और सक्रियता बढ़ाने पर जोर देने को कहा गया है, क्योंकि यह समय अक्सर आपराधिक गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता है। इससे ऐसी हर कोशिश को नाकाम किया जा सकेगा।
वहीं आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे और एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह को देहरादून में सक्रिय आपराधिक तत्वों के विरुद्ध एक विशेष अभियान चलाने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। एसटीएफ को यह सुनिश्चित करना होगा कि संगठित अपराध और गंभीर अपराधियों पर शिकंजा कसा जाए, जिससे शहर में शांति व्यवस्था बनी रहे और आमजन सुरक्षित महसूस कर सकें।
दरअसल सत्यापन अभियान के तहत पीजी (पेइंग गेस्ट) और किरायेदारों का सघन सत्यापन कराने को कहा गया है। इसके साथ ही होम-स्टे में संचालित होने वाली गतिविधियों की भी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम बाहरी और संदिग्ध तत्वों की पहचान कर उन्हें शहर से बाहर निकालने में मदद करेगा, क्योंकि बिना सत्यापन के रहने वाले संदिग्ध लोगों की वजह से अपराधों का ग्राफ बढ़ने की आशंका रहती है।
नियम तोड़ने वाले बार और पब्स पर कार्रवाई
वहीं इसके साथ ही निर्धारित समय के बाद भी संचालित हो रहे बार और पब्स पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। अक्सर देर रात तक चलने वाले ऐसे ठिकानों पर नशे और झगड़े जैसी आपराधिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान को बख्शा न जाए और कानून का पालन सुनिश्चित किया जाए।