Hindi News

हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ शब्द पर गहराया विवाद, साधु-संत सड़कों पर उतरे, ‘पुलाव’ लिखने की मांग की

Written by:Ankita Chourdia
Published:
हरिद्वार में 'वेज बिरयानी' के नाम पर बवाल मच गया है। दरअसल साधु-संतों ने सड़कों पर उतरकर 'पुलाव' लिखने की मांग की है। अखंड परशुराम अखाड़े ने दुकानदारों से यह अपील की है।

पवित्र धर्मनगरी हरिद्वार इन दिनों एक नए विवाद को लेकर चर्चा में है। दरअसल यह विवाद खाने के नाम को लेकर शुरू हुआ है, जिस पर साधु-संतों ने कड़ा विरोध जताया है। अखंड परशुराम अखाड़े के नेतृत्व में साधु-संत सड़कों पर उतरे और शहर के कई इलाकों में एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य दुकानों और ठेलों पर लिखे ‘वेज बिरयानी’ नाम का विरोध करना था। संतों का कहना है कि तीर्थनगरी की धार्मिक और सांस्कृतिक मर्यादा के हिसाब से यह नाम सही नहीं है और इसे तुरंत बदला जाना चाहिए।

दरअसल अखंड परशुराम अखाड़े ने हरिद्वार की धार्मिक पहचान और परंपराओं का हवाला देते हुए इस अभियान को शुरू किया। अखाड़े से जुड़े संत और पदाधिकारी शहर की कई दुकानों और ठेलों पर पहुंचे। उन्होंने दुकानदारों से अपील की कि ‘वेज बिरयानी’ की जगह ‘वेज पुलाव’ लिखा जाए। अभियान के दौरान कई जगहों पर संतों ने दुकानों पर लगे ‘वेज बिरयानी’ बोर्ड और पोस्टरों पर ‘वेज पुलाव’ के स्टिकर भी लगाए। दुकानदारों से कहा गया कि आगे से वे इसी नाम का इस्तेमाल करें, ताकि तीर्थनगरी की धार्मिक भावनाओं का सम्मान बना रहे।

वेज पुलाव को ‘वेज बिरयानी’ के नाम से बेचा जा रहा

वहीं अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधिक कौशिक ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए बताया कि संगठन को काफी समय से इस विषय में शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों में कहा गया था कि हरिद्वार के कई इलाकों में वेज पुलाव को ‘वेज बिरयानी’ के नाम से बेचा जा रहा है। उन्होंने बताया कि संगठन इस मामले पर काफी समय से नजर बनाए हुए था और अब लोगों को जागरूक करने के लिए यह अभियान चलाया गया है। उनका कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य हरिद्वार की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना है।

आने वाले बड़े धार्मिक आयोजनों का भी जिक्र किया

दरअसल पंडित अधीर कौशिक ने आने वाले बड़े धार्मिक आयोजनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हरिद्वार दुनिया भर में एक प्रमुख धार्मिक नगरी के रूप में पहचाना जाता है। आने वाले समय में यहां कांवड़ मेला आयोजित होना है और वर्ष 2027 में महाकुंभ का आयोजन भी प्रस्तावित है। ऐसे में शहर की धार्मिक छवि और सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने दुकानदारों से अपील की कि वे अपने बोर्डों और मेन्यू में ‘वेज बिरयानी’ की जगह ‘वेज पुलाव’ ही लिखें, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस न पहुंचे और शहर की पवित्रता बनी रहे।

अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने यह भी साफ किया कि यह अभियान किसी प्रकार के विवाद या टकराव के लिए नहीं चलाया गया। उन्होंने कहा कि सभी दुकानदारों से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से बातचीत की गई। उन्हें इस नाम परिवर्तन के पीछे की धार्मिक और सांस्कृतिक वजह समझाई गई। कई जगहों पर संगठन के सदस्यों ने खुद ‘वेज पुलाव’ के स्टिकर लगाकर दुकानदारों की मदद भी की। इस पूरी पहल का मकसद आपसी समझ और सहयोग के जरिए हरिद्वार की धार्मिक पहचान और मर्यादा को बनाए रखना है।

Ankita Chourdia
लेखक के बारे में
Follow Us :GoogleNews