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मुख्यमंत्री धामी ने सैनिक सम्मान समारोह में की शिरकत, शहीदों के परिजनों को किया सम्मानित, CSD कैंटीन का भी किया लोकार्पण

Written by:Gaurav Sharma
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार को उधम सिंह नगर के खटीमा में थे। यहां उन्होंने अपने पिता सूबेदार स्वर्गीय शेर सिंह धामी की छठी पुण्यतिथि पर सैनिक सम्मान समारोह में शिरकत की। सीएम धामी ने इस मौके पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिजनों को सम्मानित किया। इसके साथ ही, उन्होंने क्षेत्र के सैनिकों के लिए सैनिक मिलन केंद्र और सीएसडी कैंटीन का भी लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री धामी ने सैनिक सम्मान समारोह में की शिरकत, शहीदों के परिजनों को किया सम्मानित, CSD कैंटीन का भी किया लोकार्पण

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जनपद के खटीमा में गुरुवार को एक भावपूर्ण और महत्वपूर्ण आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पिता, सूबेदार स्वर्गीय शेर सिंह धामी की छठी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित सैनिक सम्मान समारोह में हिस्सा लिया। यह अवसर न सिर्फ मुख्यमंत्री के लिए व्यक्तिगत तौर पर भावुक था, बल्कि पूरे राज्य के लिए वीर सपूतों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक मंच भी था। मुख्यमंत्री धामी ने समारोह में देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने इन शहीदों के परिजनों को भी सम्मानित किया, जो देश सेवा के इस सर्वोच्च बलिदान का मूक हिस्सा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सैनिकों का यह अतुलनीय त्याग और बलिदान सदैव राष्ट्र के लिए प्रेरणा का एक अक्षुण्ण स्रोत बना रहेगा। यह आने वाली पीढ़ियों को भी देशप्रेम और समर्पण की राह दिखाएगा, और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान की याद दिलाता रहेगा।

सैनिक मिलन केंद्र और सीएसडी कैंटीन का लोकार्पण

इसी कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा क्षेत्र के सैन्य समुदाय को दो महत्वपूर्ण सुविधाएं समर्पित कीं। उन्होंने सैनिक मिलन केंद्र और एक नई सीएसडी (Canteen Stores Department) कैंटीन का विधिवत लोकार्पण किया। ये दोनों सुविधाएं सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की लंबे समय से चली आ रही जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से बनाई गई हैं। लोकार्पण के बाद, मुख्यमंत्री धामी ने स्वयं इस नई कैंटीन से कुछ सामान खरीदकर इसकी शुरुआत की। उनका यह कदम सिर्फ एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह दर्शाता है कि सरकार इन सुविधाओं को कितनी गंभीरता से ले रही है। इसका सीधा संदेश है कि इन सुविधाओं का लाभ अब तुरंत लोगों तक पहुंचना शुरू हो गया है।

नई सीएसडी कैंटीन के खुलने से खटीमा और आसपास के क्षेत्रों के हजारों सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रित परिवारों को सीधी राहत मिलेगी। अब उन्हें अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और अन्य कैंटीन आइटम के लिए दूरदराज के शहरों या बड़े सैन्य प्रतिष्ठानों तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे न सिर्फ उनका समय बचेगा, बल्कि आने-जाने का खर्च भी कम होगा। यह सुविधा विशेष रूप से उन वृद्ध पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के लिए वरदान साबित होगी, जिनके लिए लंबी दूरी तय करना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। सैनिक मिलन केंद्र भी एक महत्वपूर्ण पहल है, जो सैन्य समुदाय के सदस्यों को एक साथ आने, अनुभव साझा करने और आपस में जुड़ाव महसूस करने का एक मंच प्रदान करेगा। यह केंद्र उनकी सामाजिक और भावनात्मक जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगा और उन्हें एक-दूसरे से जोड़े रखेगा।

मुख्यमंत्री धामी ने खुद को सैनिक पुत्र बताते हुए गर्व जताया

मुख्यमंत्री धामी ने समारोह में अपने संबोधन में स्वयं को एक सैनिक पुत्र बताते हुए गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक सैनिक का बेटा होने के नाते उन्हें भारतीय सेना की सेवा के महत्व और सैनिक परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों का भलीभांति अहसास है। उन्हें पता है कि सैनिकों के बच्चों की शिक्षा, उनके स्वास्थ्य, आवास और पूर्व सैनिकों के पुनर्वास जैसी आवश्यकताएं कितनी महत्वपूर्ण होती हैं। इन्हीं अनुभवों और समझ के साथ, उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए लगातार ठोस कार्य कर रही है। यह सिर्फ कागजी योजनाएं नहीं, बल्कि जमीन पर उतरने वाले प्रयास हैं, जिनमें उन्हें हर संभव सहायता और सम्मान सुनिश्चित करना शामिल है। सरकार की प्राथमिकता है कि देश की रक्षा करने वालों का और उनके परिजनों का पूरा खयाल रखा जाए, क्योंकि उनका योगदान अमूल्य है।

इस सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में वर्तमान सैनिक, पूर्व सैनिक, उनके परिवार और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम स्थल पर उमड़ी यह भीड़ सैनिकों के प्रति समाज के गहरे सम्मान और जुड़ाव को दर्शाती थी। लोगों की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक भावनात्मक और गौरवपूर्ण माहौल दिया, जहां हर कोई देश के लिए किए गए बलिदानों को याद कर रहा था और जीवित किंवदंतियों का सम्मान कर रहा था। ऐसे कार्यक्रम न केवल सैनिकों के मनोबल को बढ़ाते हैं, बल्कि नागरिक समाज और सैन्य समुदाय के बीच के संबंधों को भी मजबूत करते हैं। यह एक सशक्त संदेश है कि उत्तराखंड देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि भी है, जहां सैनिकों का सम्मान सर्वोपरि है। उनके कल्याण के लिए सरकार और समाज दोनों पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और हमेशा रहेंगे।

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