उत्तराखंड के प्रसिद्ध गंगोत्री धाम में अब गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने रविवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया है। यह आदेश न केवल मुख्य मंदिर परिसर बल्कि गंगा मां के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा पर भी प्रभावी होगा।
समिति का सर्वसम्मत फैसला
श्री गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने स्पष्ट किया कि धाम की मर्यादा और परंपराओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने बताया कि अब से गैर-हिंदू व्यक्तियों का धाम और मुखबा क्षेत्र में प्रवेश वर्जित रहेगा। समिति के इस फैसले के बाद मंदिर प्रशासन ने निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
बद्रीनाथ-केदारनाथ में भी तैयारी
गंगोत्री मंदिर समिति के इस फैसले के बाद प्रदेश के अन्य प्रमुख धामों में भी ऐसी ही मांग उठने लगी है। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि आगामी बोर्ड बैठक में एक विशेष प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इस प्रस्ताव के तहत बद्रीनाथ और केदारनाथ सहित समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की योजना है।
“हम आगामी बोर्ड बैठक में बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम सहित मंदिर समिति के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव पेश करेंगे।” — हेमंत द्विवेदी, अध्यक्ष, BKTC
मंदिर समितियों का मानना है कि तीर्थस्थलों की धार्मिक शुचिता बनाए रखने के लिए नियमों में बदलाव आवश्यक है। इस निर्णय के बाद चारधाम यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रक्रियाओं में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने भी मंदिर समिति के इस निर्णय का समर्थन किया है।
हरकी पैड़ी और पुराने नियम
उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर प्रवेश को लेकर यह पहली बार बहस नहीं हो रही है। हरिद्वार के हरकी पैड़ी को लेकर भी पहले कई बार गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग उठ चुकी है। इस मांग के समर्थन में हरिद्वार नगर निगम के वर्ष 1916 के बायलॉज का हवाला दिया जाता है, जो ब्रिटिश काल से लागू बताए जाते हैं।
कुछ संगठनों और गंगा सभा से जुड़े लोगों का कहना है कि इन पुराने नियमों का उद्देश्य गंगा घाटों और पवित्र स्थलों की धार्मिक मर्यादा बनाए रखना था। उनका मानना है कि समय के साथ इन नियमों को नजरअंदाज किया गया, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन के बाद एक बार फिर इन नियमों पर चर्चा तेज हो गई है।





