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उपनल कर्मियों की हड़ताल पर उत्तराखंड सरकार सख्त, ‘नो वर्क, नो पे’ का आदेश जारी, कार्रवाई की चेतावनी, कर्मचारी भी अड़े

Written by:Ankita Chourdia
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देहरादून में उपनल कर्मचारियों की हड़ताल 10वें दिन भी जारी है। इस बीच, उत्तराखंड शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 'नो वर्क, नो पे' का नियम लागू कर दिया है और अनुपस्थित कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कर्मचारियों के रुख की देखकर लगता है वह भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
उपनल कर्मियों की हड़ताल पर उत्तराखंड सरकार सख्त, ‘नो वर्क, नो पे’ का आदेश जारी, कार्रवाई की चेतावनी, कर्मचारी भी अड़े

देहरादून: अपनी मांगों को लेकर पिछले 10 दिनों से हड़ताल कर रहे उपनल कर्मचारियों के खिलाफ उत्तराखंड सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। शासन ने हड़ताल पर गए कर्मचारियों के विरुद्ध ‘नो वर्क, नो पे’ (काम नहीं तो वेतन नहीं) का नियम (formal) रूप से लागू कर दिया है। इसके साथ ही अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

हड़ताल के लंबा खिंचने और सरकारी कामकाज पर पड़ रहे असर को देखते हुए शासन ने यह कदम उठाया है। सचिव दीपेन कुमार चौधरी की ओर से इस संबंध में सभी विभागों को एक पत्र जारी किया गया है, जिसमें तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

विभागों को अनुपस्थित कर्मियों की सूची बनाने का निर्देश

जारी किए गए आदेश में सभी विभागों, निगमों और संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे आउटसोर्स माध्यम से तैनात उन सभी उपनल कार्मिकों की सूची तैयार करें जो हड़ताल के कारण अपने कार्यों से अनुपस्थित हैं। शासन ने स्पष्ट किया  कि इन चिन्हित कर्मचारियों को हड़ताल की अवधि का वेतन नहीं दिया जाएगा।

दंडात्मक कार्रवाई की भी तैयारी

वेतन रोकने के अलावा, सरकार ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि हड़ताल पर रहने वाले कर्मचारियों को उनके आचरण के अनुसार सेवा नियमों के तहत दंडात्मक कार्यवाही का सामना करना पड़ सकता है। विभागों को इस संबंध में त्वरित कार्रवाई कर संबंधित इकाइयों को सूचित करने के लिए कहा गया है।

कर्मचारी भी अपनी मांगों पर अड़े

दूसरी ओर, सरकार की इस चेतावनी के बाद भी उपनल कर्मचारी संगठन पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे हड़ताल जारी रखेंगे। उनका तर्क है कि सरकार को कार्रवाई करने की बजाय उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। इस गतिरोध के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और आने वाले दिनों में कई सरकारी सेवाओं पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

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