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राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य भर्ती प्रक्रिया रद्द, आयोग ने आठ फरवरी की परीक्षा भी की निरस्त

Written by:Neha Sharma
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उत्तराखंड में राजकीय इंटर कॉलेजों और राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य व प्रधानाचार्या पदों की विभागीय भर्ती प्रक्रिया को राज्य लोक सेवा आयोग ने रद्द कर दिया है।

उत्तराखंड में राजकीय इंटर कॉलेजों और राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य व प्रधानाचार्या पदों की विभागीय भर्ती प्रक्रिया को राज्य लोक सेवा आयोग ने रद्द कर दिया है। आयोग ने इस संबंध में शिक्षा सचिव को पत्र भेजकर जानकारी दी है। इसके साथ ही आठ फरवरी 2026 को प्रस्तावित सीमित विभागीय परीक्षा भी निरस्त कर दी गई है।

अधियाचन वापस लेने का अनुरोध

शिक्षा सचिव ने 30 अक्तूबर को राज्य लोक सेवा आयोग को पत्र भेजकर शासन की ओर से भेजे गए भर्ती अधियाचन को वापस लेने का अनुरोध किया था। इसके बाद आयोग ने इस पर निर्णय लेते हुए परीक्षा रद्द करने की औपचारिक घोषणा की। आयोग के सचिव आलोक पांडेय ने पत्र जारी कर बताया कि विभागीय परीक्षा अब नहीं होगी और आगे की प्रक्रिया के लिए शासन से निर्देशों की प्रतीक्षा की जाएगी।

1184 पद अभी भी खाली

प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के कुल 1385 पदों में से 1184 पद रिक्त हैं। सरकार ने पहले निर्णय लिया था कि इन पदों में से 50 प्रतिशत पदों पर सीमित विभागीय परीक्षा के जरिए पदोन्नति दी जाएगी। लेकिन अब परीक्षा रद्द होने से यह भर्ती प्रक्रिया फिलहाल स्थगित हो गई है। शिक्षा विभाग सूत्रों के अनुसार, अब इन पदों पर नई प्रक्रिया या संशोधित अधियाचन तैयार किया जा सकता है।

शिक्षक संघ ने रैली स्थगित की

इधर, राजकीय शिक्षक संघ ने अपनी प्रस्तावित रैली को स्थगित कर दिया है। संगठन के अध्यक्ष राम सिंह चौहान और महामंत्री रमेश चंद्र पैन्यूली ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर बताया कि शनिवार को शिक्षा मंत्री आवास कूच का कार्यक्रम अब नहीं होगा। उन्होंने कहा कि 9 अक्तूबर को संगठन की सरकार से हुई वार्ता के बाद 34 सूत्रीय मांगपत्र पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।

शासन-शिक्षक टकराव की स्थिति टली

भर्ती परीक्षा रद्द होने और शिक्षक रैली स्थगित किए जाने के बाद फिलहाल शिक्षा विभाग में तनावपूर्ण स्थिति टल गई है, लेकिन रिक्त पदों को लेकर असमंजस बना हुआ है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि शिक्षकों की पदोन्नति और प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों में देरी से शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। अब सबकी निगाहें शासन के अगले कदम पर हैं कि यह रिक्तियां प्रत्यक्ष भर्ती या नई विभागीय प्रक्रिया से भरी जाएंगी।

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