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उत्तराखंड की विरासत को नया जीवन देगी धामी सरकार, लिया बड़ा फैसला

Written by:Deepak Kumar
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उत्तराखंड सरकार ऐतिहासिक धरोहरों को कानूनी मान्यता देने जा रही है। मूर्तियों, पांडुलिपियों जैसी वस्तुओं को लाइसेंस मिलेगा और म्यूजियम में रखा जाएगा। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि इसके बदले में प्रोत्साहन राशि क्यों नहीं दी जाएगी?
उत्तराखंड की विरासत को नया जीवन देगी धामी सरकार, लिया बड़ा फैसला

उत्तराखंड सरकार ने ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की वस्तुओं को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य में मौजूद प्राचीन मूर्तियां, ताम्रपत्र, पांडुलिपियां, शिलालेख और अन्य ऐतिहासिक कलाकृतियों को रखने वालों को लाइसेंस और उनका मालिकाना हक मिलेगा। इससे पहले भारतीय पुरातत्व अधिनियम 1958 के तहत कोई भी व्यक्ति 100 साल से अधिक पुरानी धरोहर को अपने पास नहीं रख सकता था। इसी वजह से कई लोग इन वस्तुओं को छिपाकर रखते थे या चोरी-छिपे बेच देते थे। अब सरकार इन वस्तुओं को सामने लाकर उन्हें संरक्षित करना चाहती है।

डिजिटल डेटाबेस बनेगा, विरासत घर होंगे स्थापित

सरकार हर जिले में विशेष अभियान चलाकर यह जानकारी इकट्ठा करेगी कि किसके पास कौन-सी ऐतिहासिक वस्तु है। पुरातत्व विशेषज्ञों और इतिहासकारों की टीम इन वस्तुओं की पहचान, उनका काल निर्धारण और ऐतिहासिक महत्व का अध्ययन करेगी और उनका एक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इसके अलावा राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर ‘विरासत घर’ बनाए जाएंगे, जहां इन वस्तुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। यह पहल न केवल धरोहरों को संरक्षित करेगी बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देगी।

फॉरेस्ट एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव केंद्र को भेजेगी सरकार

राज्य सरकार केंद्र से अनुरोध करेगी कि भारतीय पुरातत्व अधिनियम में संशोधन किया जाए ताकि राज्य अपने स्तर पर लाइसेंस जारी कर सके। वर्तमान में धरोहर रखने वालों को कानूनी अधिकार नहीं होता जिससे उन्हें डर बना रहता है। यदि संशोधन होता है तो लोग बिना डर अपनी धरोहर सामने ला सकेंगे और वैज्ञानिक तरीके से उसका संरक्षण हो सकेगा।

संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों की राय

नैनीताल के क्षेत्रीय संरक्षण अधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र जोशी ने इस पहल को क्रांतिकारी बताया। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में अब भी कई ऐसी ऐतिहासिक वस्तुएं हैं जो कभी सार्वजनिक नहीं हुईं। अब उन्हें कानूनी धरोहर के रूप में संरक्षित किया जा सकेगा और शोध व अध्ययन के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा।

कांग्रेस ने उठाए सवाल, मांगी प्रोत्साहन राशि

हालांकि कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी ने सवाल उठाया कि सरकार बताएं कि जो लोग अपनी धरोहरें सौंपेंगे उन्हें बदले में क्या मिलेगा? उन्होंने कहा कि सिर्फ लाइसेंस से काम नहीं चलेगा, सरकार को कोई प्रोत्साहन राशि या सुविधा भी देनी चाहिए ताकि लोग अपनी वर्षों पुरानी धरोहरें सरकार को सौंपने के लिए प्रेरित हो सकें।

 

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लेखक के बारे में
तेज ब्रेकिंग के साथ सटीक विश्लेषण और असरदार लेखन में माहिर हैं। देश-दुनिया की हलचल पर नजर रखते हैं और उसे सरल व असरदार तरीके से लिखना पसंद करते हैं। तीन सालों से खबरों की दुनिया से जुड़े हैं। View all posts by Deepak Kumar
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