जनसुनवाई के दौरान आत्मदाह करने को मजबूर हुआ पिता, कहा सिस्टम ने मजबूर कर दिया

जनसुनवाई के दौरान आत्मदाह करने को मजबूर हुआ पिता, कहा सिस्टम ने मजबूर कर दिया

ममता पांडे/विदिशा। बेटी की तलाश में दर-दर भटक रहे पिता ने आज जनसुनवाई के दौरान आत्मदाह करने की धमकी दी। पीड़ित शख्स के हाथ में कोरोसिन से भरी बोतल थी। हलांकि समय रहते वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसके हाथ से बोतल छीन ली। पीड़ित का आरोप है गुलाबगंज थाना क्षेत्र के सुआखेङी से उसकी 14 वर्षीय बेटी 6 महीने पहले लापता हो गयी थी। थाने में एफआईआर दर्ज कराया लेकिन 6 महीने बीत जाने के बाद भी बेटी का कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस सिर्फ आश्वासन देती है अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई और इसी के चलते पीड़ित शख्स ने आत्मदाह करने की धमकी दी। मामला मीडिया के सामने आने के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच करने की बात कह रही है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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