पैसों को लिए बेटे ने रची साजिश, किडनैपर बनकर घर वालों से मांगी फिरौती

पैसों को लिए बेटे ने रची साजिश, किडनैपर बनकर घर वालों से मांगी फिरौती

ममता पांडे/विदिशा। व्यापार करने के लिए एक युवक ने अपने अपहरण की झूठी कहानी रची सुनकर आपको हैरानी हो रही होगी लेकिन ये हकीकत है। दरअसल युवक  अपने पिता से व्यापार करने के लिए एक लाख रूपए की मांग कर रहा था। लेकिन पिता ने जब पैसे देने से मना कर दिया तो उसने अपहरण की झूठी  कहानी रची। युवक खुद अपहरणकर्ता बनकर परिजनों से बात की और अपहरण होने की सूचना दी और खुद के खाते में 1 लाख रुपये डलवाने की मांग की। युवक के पिता ने फौरन इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने केस दर्ज कर पूरे मामले की जांच करते हुए युवक को भोपाल के नादरा बस स्टैंड के पास एक होटल से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने युवक से पूछाताछ की जिसमें युवक ने बताया की उसका अपहरण नहीं हुआ था उसने खुद अपहरणकर्ता बनकर बात की थी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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