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भारत ने इन 2 सब्जियों का परमाणु बम परीक्षण में किया था इस्तेमाल, नाम सुनकर चौक गया था विश्व, फिर कई देशों ने भी किया यही काम

Written by:Pratik Chourdia
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दुनिया में केवल 9 देशों के पास परमाणु बम हैं, और भारत उन ताकतवर देशों में शुमार है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत के पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण में प्याज और आलू जैसी साधारण सब्जियों का भी इस्तेमाल हुआ था।
भारत ने इन 2 सब्जियों का परमाणु बम परीक्षण में किया था इस्तेमाल, नाम सुनकर चौक गया था विश्व, फिर कई देशों ने भी किया यही काम

Nuclear Test ( भारत ने परमाणु बम परीक्षण में आलू और प्याज का किया था इस्तेमाल )

नई दिल्ली, Nuclear Test: विज्ञान के क्षेत्र में आए दिन चौंकाने वाली खोजें सामने आती रहती हैं, लेकिन जो जानकारी हाल ही में उजागर हुई है, वह पूरी दुनिया को हैरान कर गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने अपने परमाणु बम परीक्षणों में आम तौर पर रसोई में इस्तेमाल होने वाली सब्जियां प्याज और आलू का उपयोग किया, जिससे पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई। अब कई देशों ने भारत की इस पद्धति को अपनाना शुरू कर दिया है।

क्या होती है परमाणु परीक्षण में प्याज की भूमिका?

जानकारी के मुताबिक, परमाणु विस्फोट के दौरान उत्पन्न होने वाली घातक अल्फा, बीटा और गामा किरणों को अवशोषित करने के लिए प्याज का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि प्याज में मौजूद फ्लेवोनोइड्स और फेनोलिक एसिड इसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-जेनोटॉक्सिक गुण प्रदान करते हैं, जो विकिरण Radiation के प्रभाव को कम करने में सहायक हैं। विकिरण की खतरनाक किरणों से बचाने के लिए परमाणु परीक्षण स्थल पर लाखों टन प्याज को मिट्टी में दबा दिया गया, जिससे विकिरण का प्रभाव नियंत्रित किया जा सके। यह तकनीक इतनी प्रभावी साबित हुई कि कई देशों ने इसे अपने परीक्षणों में अपनाने पर विचार किया।

किस तरह किया गया आलू का इस्तेमाल?

वहीं, आलू का उपयोग भी विकिरण के प्रभाव को कम करने में हुआ। वैज्ञानिकों ने पाया कि आलू गामा किरणों को अवशोषित करने में अत्यधिक सक्षम है, जिससे अर्ध-नाशनीय खाद्य पदार्थों पर परमाणु विस्फोट का प्रभाव समझा जा सके। टेनेसी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने आलू के पौधों के वैज्ञानिक प्रयोगों में यह साबित किया कि आलू विकिरण अवशोषित करने वाले सेंसर के रूप में काम कर सकता है, जो भविष्य में समुदायों को हानिकारक विकिरण से बचाने में सहायक हो सकता है।

भारत की यह अनोखी तकनीक अब विश्वभर में चर्चा का विषय बन गई है, और कई देशों ने इसे फॉलो करने का निर्णय लिया है, जिससे यह साबित होता है कि विज्ञान में असंभव कुछ भी नहीं है।

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