दिल पर पत्थर रखकर मां ने बेटे को मरा हुआ माना, 12 साल बाद आया उसका फोन

दिल पर पत्थर रखकर मां ने बेटे को मरा हुआ माना, 12 साल बाद आया उसका फोन

Mother reunited with lost Son : किसी भी मां से उसके बच्चे का बिछड़ना बहुत दुखद होता है। और अगर कोई मां ये मानने को मजबूर हो जाए कि उसका बच्चा अब इस दुनिया में नहीं है तो इस दुख की कल्पना भी मुश्किल है। लेकिन कभी कभी कुछ चमत्कार भी घटित होते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ इस महिला के साथ, जब 12 साल बाद उसके पास खोए हुए बेटे का फोन आया।

ये घटना है स्कॉटलैंड के लैनार्कशायर की। निकोलस कर्टिस (Nicholas Curtis) 2000 के दशक में स्पेन और फ्रांस में हाइकिंग के लिए निकले थे। डेली स्टार न्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक 2009 तक उनकी अपनी मां जॉयस कर्टिस (Joyce Curtis) से बात होती रही लेकिन 2009 के बाद उनका परिवार से संपर्क टूट गया। एक साल तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर उनकी मां घबरा गई और उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई। इसके बाद साल 2010 में उन्हें एक फोन आया जिसमें कहा गया कि उनका बेटा फ्रांस के किसी अस्पताल में भर्ती है। जॉयस अपने पति के साथ वहां पहुंची लेकिन वो वहां से गायब हो चुका था। इसके बाद साल पर साल बीतते गए और उन्हें अपने बेटे के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। आखिर दिल पर पत्थर रखकर उन्होने ये मान लिया कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है।

लेकिन हाल ही में जो खबर आई वो किसी चमत्कार से कम नहीं थी। ब्रिटिश कॉन्‍सुलेट के माध्यम से जॉयस को सूचना मिली कि उनका बेटा निकोलस जीवित है। उनकी बेटे से फोन पर बात भी हुई। बेटे से जब उन्होने पूछा कि क्या वो घर वापिस आना चाहता है तो उसने हां कहा। इसके बाद से जॉयस की खुशी का ठिकाना नहीं है। वो इसे क्रिसमस गिफ्ट मान रही हैं। फॉरेन, कॉमनवेल्‍थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस के प्रवक्‍ता ने कहा कि हम फ्रांस में मौजूद निकोलस की देखभाल कर रहे हैं और उसे परिवार से मिलाने के लिए पूरी मदद की जा रही है। उसका परिवार भी 12 साल बाद उसके घर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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