Viral Video : तीन दिन मॉर्निंग वॉक पर नहीं आया शख्स, दोस्तों का हुजूम बैंड बाजा लेकर जा पहुंचा जगाने

funny friends

Viral Video : इन दिनों शादियों का मौसम चल रहा है तो कहीं भी बैंड बाजे देखने सुनने को मिल जाते हैं। शादियों में धूम धड़ाके के लिए बैंड बाजों का इस्तेमाल हमेशा से होता आया है। लेकिन क्या कभी आपने किसी को नींद से जगाने के लिए बैंड बाजे वालों को बुलाया है ?  आज हम आपके लिए ऐसा ही एक मजेदार वी़डियो लेकर आए हैं।

दोस्तों की मस्ती

दोस्त सुख दुख के साथी होते हैं। इनके साथ हम अपने जीवन के कई खास पल साझा करते हैं। वहीं दोस्तों के बीच मस्ती मज़ाक, छेड़छाड़, हल्की फुल्की तकरार और रौब गांठना भी चलता रहता है। यही इस रिश्ते की खूबसूरती है। दोस्त आपके जीवन में कब क्या मोड़ लेकर आ जाएं, कहा नहीं जा सकता। अब इन्हीं जनाब को लीजिए…ये तीन दिन तक मॉर्निंग वॉक पर नहीं गए तो दोस्तों ने इनकी नींद तोड़ने का क्या ही मज़ेदार तरीका निकाल डाला।

बैंड बाजा लेकर जा पहुंचे जगाने

दरअसल दोस्तों का ये ग्रुप रोज मॉर्निंग वॉक के लिए जाता था। लेकिन एक महाशय ने तीन दिन तक अपने दोस्तों को गच्चा दे दिया। वो शायद सुबह देर तक सोना चाहते थे। लेकिन ये बात उनके दोस्तों को कुछ खास पसंद नहीं आई और फिर क्या था, उन्होने इसका एक मजेदार तरीका निकाल लिया। ये सारे दोस्त बैंड बाजे के साथ अपने उस एक दोस्त को उठाने उसके घर जा पहुंचे। सुबह सुबह घर के बाहर फुल वॉल्युम में बज रहे बैंड बाजे ने उनकी क्या, पूरे मोहल्ले की नींद खोल दी। इस वीडियो को देखकर फिर साबित हो जाता है कि दोस्त जिंदगी में कितने खास होते हैं। उनके कारण जीवन खुशमिज़ाज बना रहता है है और मौज मस्ती का दौर भी चलता रहता है। ये वीडियो एक्स पर RVCJ Media नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है और तेजी से वायरल हो रहा है। अब तक इसे एक मिलियन से ज्यादा लोग देख चुके हैं और इसपर तरह तरह के मजेदार कमेंट्स आ रहे हैं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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