आगर मालवा जिले के सुसनेर नगर में सामने आई इस घटना ने एक बार फिर बुजुर्गों की सुरक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक महिला लंबे समय से घर के भीतर बंद थी और बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी। जब आसपास के लोगों ने उसकी आवाज सुनी तो उन्होंने तुरंत जनप्रतिनिधियों और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने महिला को बाहर निकाला।
मामले के सामने आने के बाद इलाके में काफी चर्चा रही। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पड़ोसियों ने ध्यान नहीं दिया होता तो बुजुर्ग महिला की हालत और खराब हो सकती थी। हालांकि पुलिस का कहना है कि अभी तक किसी पक्ष ने लिखित शिकायत नहीं दी है, इसलिए पूरे मामले की कानूनी स्थिति शिकायत मिलने के बाद ही स्पष्ट होगी।
कैसे खुला पूरा मामला ?
जानकारी के मुताबिक सुसनेर नगर के वार्ड क्रमांक-5 के कुछ लोगों ने नगर परिषद अध्यक्ष प्रदीप सोनी और पार्षद प्रतिनिधि पवन शर्मा को सूचना दी कि इलाके की एक बुजुर्ग महिला को घर के अंदर बंद रखा गया है। सूचना मिलते ही दोनों मौके पर पहुंचे और देखा कि महिला लोहे की जाली के पीछे बंद थी। वह बाहर निकलने का प्रयास कर रही थी, लेकिन कमरे का दरवाजा बाहर से बंद था।
इसके बाद महिला के तीनों बेटों को मौके पर बुलाया गया। जब कमरे की चाबी के बारे में पूछा गया तो किसी ने भी अपने पास चाबी होने की बात स्वीकार नहीं की। हालात को देखते हुए डायल-112 पुलिस को बुलाया गया। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दरवाजे का ताला तोड़ा और बुजुर्ग महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद महिला और उसके परिजनों को सुसनेर थाने ले जाया गया, जहां सभी पक्षों से अलग-अलग बातचीत की गई। पुलिस ने फिलहाल मामले को समझाइश के जरिए सुलझाने की कोशिश की और महिला की इच्छा जानने के बाद उसे उसके सबसे छोटे बेटे के साथ भेज दिया गया।
क्या ऐसा व्यवहार कानूनन अपराध है?
इस घटना ने एक बार फिर बुजुर्गों की सुरक्षा और परिवार की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत बच्चों पर अपने माता-पिता की देखभाल करना कानूनी जिम्मेदारी भी है। यदि किसी बुजुर्ग के साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना, उपेक्षा या उन्हें बेसहारा छोड़ने जैसी स्थिति बनती है, तो वे कानून की मदद ले सकते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन और पुलिस भी कार्रवाई कर सकती है।






