एक जगह जहां ‘मरना मना है’, एक गाँव रंगा है सपनीला नीला, जानिए दुनिया की कुछ अनोखी हैरतअंगेज़ बातें

क्या आप जानते हैं कि नॉर्वे के कुछ हिस्सों में सर्दियों में सूर्य कई महीने तक नहीं निकलता। लेकिन यहां के लोग इस अंधकार को उत्सव में बदल देते हैं। वे ‘लाइट फेस्टिवल’ मनाते हैं जिसमें रंग-बिरंगी रोशनी और संगीत से अंधेरा जगमगा उठता है। अमेरिका में बहुत से गहरे और नीले जलाशय होते हैं जिन्हें ‘ब्लू होल्स’ कहा जाता है। इंडोनेशिया के कुछ गांवों में ‘उड़ने वाली मछली’ यानी फ्लाइंग फिश का त्योहार मनाया जाता है और दुनिया के सबसे खुशहाल देश का खिताब भूटान के हिस्से है।
Our Mysterious Earth

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हमारी धरती जितनी विशाल है, उतनी ही रहस्यमयी भी। इसे पूरी तरह देखना समझना लगभग असंभव है। ऐसी कई बातें, आदतें, परंपराएं, मान्यताएं हैं जो हमें आश्चर्य में डाल सकती हैं। कहीं जीवन की गति तेज़ है तो कहीं वक्त जैसे ठहर सा गया हो। कहीं सुबह की शुरुआत मंत्रों से होती है, तो कहीं संगीत की धुनों से। कोई जीवन को सादगी में तलाशता है, तो कोई रंगों और रोमांच में।

ये विविधता सिर्फ बोलियों, आदतों पहनावे  या मौसमों की नहीं है बल्कि सोच, आस्था, व्यवहार और सपनों तक में पसरी होती है। और यही विविधता इस दुनिया को सुंदर भी बनाती है। हम हैरत भरी नजरों से देखते हैं कि हमारे ग्रह के किसी कोने में जीवन ऐसा भी है। ऐसी बातें हो हमें चौंकाती है, हर मोड़ पर कुछ नया सिखाती है। आइए आज हम कुछ ऐसी ही अनूठी बातें जानते हैं।

1. सोकोत्रा द्वीप: धरती पर दूसरी दुनिया

हिंद महासागर में यमन का सोकोत्रा द्वीप किसी अंतरिक्षीय ग्रह जैसा है। यहां के ड्रैगन ब्लड ट्र लाल रस और छतरी जैसे आकार के लिए मशहूर हैं। ये किसी दूसरी दुनिया जैसा लगता है। यूनेस्को ने 2008 में इसे विश्व धरोहर घोषित किया है। यहाँ मौजूद 37 प्रतिशत पौधे ऐसे हैं जो कहीं और नहीं मिलते हैं।

2. लॉन्ग इयरबेन: जहां मृत्यु पर है पाबंदी

नॉर्वे के बर्फीले लॉन्ग इयरबेन में मरना मना है। इस बात को थोड़ी आसान तरह से समझते हैं। दरअसल यहां इतनी ठंड पड़ती है कि शव सड़ते नहीं और उसमें मौजूद वायरस जीवित रह सकते हैं। इसीलिए यहां 1950 के बाद से कब्रिस्तान में शव दफनाने पर रोक है। इसीलिए अगर कोई गंभीर मरीज होता है या ऐसा व्यक्ति जो अपनी अंतिम साँस ले रहा हो तो उसे किसी दूसरी जगह ले जाया जाता है। इस तरह कह सकते हैं कि यहां मरने पर पाबंदी है।

3. गिएथूर्न: नावों का गाँव

नीदरलैंड का गिएथूर्न सड़कों के बिना पानी पर तैरता है। नहरें, नावें, और लकड़ी के पुल इसे “वेनिस ऑफ द नॉर्थ” बनाते हैं। रंग-बिरंगे फूलों से सजे पारंपरिक डच घर, हर कोने में फैली हरियाली और नहरों का शांत सौंदर्य के कारण गिएथूर्न न सिर्फ एक अनोखा पर्यटन स्थल है, बल्कि ये विशेषताएं इसे किसी सपनों की नगरी जैसा भी बनाती हैं।

4. जुजकार: नीले रंग का सपना

कल्पना कीजिए एक ऐसा गांव जहां हर दीवार, हर छत, हर गली नीले रंग में डूबी हो। स्पेन का छोटा सा गांव जुजकार इस कल्पना को हकीकत में जी रहा है। 2011 में हॉलीवुड की मशहूर फिल्म The Smurfs के प्रमोशन के लिए इस गांव को पूरी तरह नीला रंगा गया था। पर यह महज़ एक अस्थायी बदलाव नहीं रह। गांववालों को यह नीलापन इतना भा गया कि उन्होंने इसे हमेशा के लिए अपना लिया। अब ये गांव  फोटोग्राफरों और पर्यटकों का फेवरेट है।

5. माइक्रोरैप्टर: सबसे छोटा डायनासोर

हम जब भी डायनासोर की बात करते हैं तो हमारी कल्पनाओं में एक विशालकाय जीव आता है। लेकिन, चीन में खोजा गया माइक्रोरैप्टर दुनिया का सबसे छोटा डायनासोर है जो सिर्फ 16-30 इंच लंबा है। इसके पंख इसे डायनासोर और पक्षी का मिश्रण बनाते हैं। माइक्रोरैप्टर की खास बात है उसके चार पंख..दो आगे के पैरों पर और दो पीछे के पैरों पर। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये पंख उसे ग्लाइड करने यानी एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक फुर्ती से उड़ने की क्षमता देते थे।

6. अंटार्कटिका: बर्फीला रेगिस्तान

जब हम ‘रेगिस्तान’ शब्द सुनते हैं तो ज़हन में तपते सूरज, रेत के टीले और प्यास से जूझती ज़िंदगी की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धरती का सबसे बड़ा रेगिस्तान रेत से नहीं बल्कि बर्फ की मोटी चादर से ढका हुआ है ? हम बात कर रहे हैं अंटार्कटिका की। ये सिर्फ ठंडा महाद्वीप ही नहीं है बल्कि 5.5 मिलियन वर्ग मील में फैला दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान भी है। यहां साल भर में औसतन इतनी कम बारिश होती है कि इसे तकनीकी रूप से रेगिस्तान की श्रेणी में रखा गया है और इसीलिए इसे ‘ठंडा रेगिस्तान’ भी कहा जाता है।

(डिस्क्लेमर : ये लेख विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त जानकारियों पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।)

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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