पटवारी की शादी में नाच रहे थे एक हजार से ज्यादा लोग, पिता सहित रिश्तेदारों पर एफआईआर

पटवारी की शादी में नाच रहे थे एक हजार से ज्यादा लोग, पिता सहित रिश्तेदारों पर एफआईआर

अलीराजपुर/यतेंद्रसिंह सोलंकी

लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान पटवारी (Patwari) को भारी भीड़ जुटाकर धूमधाम से शादी रचाना महंगा पड़ गया| आलीराजपुर (Alirajpur) जिले के जोबट थाने के बिलासा गांव के निवासी पटवारी की शादी में सैकड़ो लोग बिना मास्क के डांस कर रहे थे और पुलिस पहुँच गई| पुलिस ने पटवारी के पिता सहित रिश्तेदारों पर धारा 188 के तहत एफआईआर (F.I.R) दर्ज की है ।

सरकार ने शादी समारोह में 50 लोगों के शामिल होने संख्या निर्धारित की है| लेकिन कई जगह इसका पालन न करते हुए शादियों में भीड़ इकठ्ठा की जा रही है| जोबट थाने के बिलासा गांव में ऐसा ही हुआ| जब पटवारी की शादी में सैंकड़ों लोग इकठ्ठा हो गए| पटवारी कनु पिता हबु चौहान ने एसडीएम से 25 लोगों की अनुमति ली थी। रविवार रात को शादी होने के बाद गांव में करीब 1 हजार से 1500 लोग बिना मास्क लगाए नाच रहे थे। इस दौरान किसी ने वीडियाे बनाकर पुलिस तक पहुंचा दिया।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गई| जहां देखा कि 1 हजार से 1500 लोग शादी की खुशियां मनाते हुए नाच-गा रहे थे। पटवारी ने भीड़ जुटाई, सोशल डिस्टेंसिंग का भी उल्लघंन किया। मौके पर पहुंच कर पुलिस ने आयोजन बंद कराया। अनुमति और लॉकडाउन का उल्लघंन करने वाले पटवारी के खिलाफ धारा 188 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जिन पटवारी साहब की यह शादी थी वह अलीराजपुर जिले के मूल निवासी होकर बैतुल जिले मे पदस्थ है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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