मंडी के बाहर जाम, बिना सौदा पत्रक नहीं हो रही फसल की बिक्री

मंडी के बाहर जाम, बिना सौदा पत्रक नहीं हो रही फसल की बिक्री

अशोकनगर-(हितेंद्र बुधौलिया) लॉकडाउन का पालन करने एवं सोशल डिस्टेंसिग को बनाये रखते हुये अशोकनगर कृषि उपज मंडी में सौदा पत्रक से फसल बेचने की व्यवस्था आज पूरी तरह से अप्रभावी होती नजर आई। मंडी के सामने बाईपास रोड पर फसल से भरी ट्रॉलियों को रोके जाने से जाम की स्थिति बन गई है। वही शहर के प्रमुख द्वारों पर फसल से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ओ को रोक दिया गया है। किसानो की भीड़ बढ़ती देख पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुँच गये है।

उल्लेखनीय है कि लॉक डाउन कि बन्दिशों में छूट देते हुए किसानों की फसल को बेचने के लिए किसान एवं व्यापारी के बीच सौदा पत्रक की व्यवस्था बनाई थी। जिसके तहत फसल को सीधे मंडी में लाने की वजह पहले किसान एवं व्यापारी के बीच उसके सैंपल के आधार पर भाव तय करके सौदा पत्र दिया जाता था जिन किसानों का सौदा पत्रक होता था मंडी में सिर्फ उन्हीं की फसल को प्रवेश दिया जा रहा था मगर आज हजारों ऐसे लोग ट्रेक्टर ट्रॉलियां लेकर अशोकनगर आ गए जिनके पास सौदा पत्रक नहीं था। इस कारण यह व्यवस्था चरमरा गई है। सुबह से लगी ट्रैक्टर ट्रॉलियों की लाइन के कारण मंडी के सामने के रोड एवं बाईपास रोड पर जाम लग गया है। यातायात को बनाए रखने के लिए पुलिस ने शहर के प्रवेश द्वारों पर ट्रैक्टर ट्रॉली ओं को रोकना शुरू कर दिया मगर सबसे बड़ी परेशानी जो लोग शहर में आ चुके उनके कारण हो रही है इस जाम के कारण जिन किसानों के पास सौदा पत्रक है वह भी मंडी में प्रवेश नहीं कर पा रहे।

मंडी से जुड़े कर्मचारियों का कहना है की सौदा पत्रक के लिए भी प्रशासन ने नई व्यवस्था बनाई है। जिसके तहत किसानों को अपनी फसल का सैंपल लेकर मंडी नहीं आना पड़ेगा ।व्यापारी एवं कर्मचारी गांव गांव जाकर फसल देखकर सौदा पत्रक किसानों को देंगे। जिन किसानों को सौदा पत्र दिया जाएगा सिर्फ उन्हीं की फसल तौली जाएगी। एक व्यापारी 1 दिन में 15 से ज्यादा किसानों की फसल नहीं खरीद पाएगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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