मुंगावली में भी दिखा बन्द का खासा असर सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

मुंगावली में भी दिखा बन्द का खासा असर सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

अशोकनगर मुंगावली। अलीम डायर।

देशभर में एनआरसी ओर सी ए ए का विरोध रुकने का नाम नहीं ले रहा है अभी तक देशभर में इसके विरोध में हजारों सभाएं विशाल रैलियां और कई सारे आंदोलन चलाए जा रहे हैं इसके विरोध में 29 जनवरी को भारत बंद का आह्वान किया गया था जिसमें आज भारत बंद के दौरान अशोकनगर जिले के मुंगावली तहसील में भी भारत बंद का खासा असर देखने को मिला सुबह से ही नगर की सब्जी मंडी बस स्टैंड मेन बाजार पुराना बाजार कंचन गली सभी बंद दिखें तो वही भारत बंद को लेकर किसी भी दुकानदार और व्यापारियों से दुकान बंद करने के लिए जबरदस्ती नहीं की गई अपनी मर्जी से लोगों ने बाजार बंद रखा।
इस दौरान बस स्टैंड जय स्तभ चौराहे पर मुस्लिम एकता मंच और भीम आर्मी सेना के तत्वधान में महात्मा गांधी और भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के साथ एक आम सभा का आयोजन किया गया जिसमें एनआरसी और सी ए ए कानून के बारे में वक्ताओं ने अपने अपने विचार लोगों के सामने रखें जिसमें वक्ताओं द्वारा कहा गया कि हिंदुस्तान में हमेशा गंगा जमुना की तहजीब देखने को मिलती है और सभी धर्म के लोग हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई मिलजुल कर एक दूसरे के सुख दुख में साथ देकर हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल देते हैं लेकिन कुछ लोगों को यह एकता रास नहीं आ रही है और वह एनआरसी और एनसीआर जैसे काले कानून लाकर हमारे आपसी भाईचारे में मतभेद पैदा कर हममें फूट डालकर हमारी गंगा जमुना तहजीब को खंडित करने की कोशिश कर रहे हैं जो कि कभी सफल नहीं होगी अगर हमारा भाईचारा कायम रहा तो ऐसे कई कानून आते जाते रहेंगे पर हमारी एकता पर कभी आंच नहीं आएगी।
बंद के दौरान पुलिस प्रशासन की सजगता नगर के चप्पे-चप्पे पर तैनात रही नगर के हर गली चौराहे पर पुलिस के जवान तैनात रहे और सभा के दौरान प्रशासन के साथ भारी पुलिस बल भी मौजूद रहा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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