ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा और बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा जाता है। बुध संचार, बुद्धि और व्यापार के कारक माने जाते हैं वहीं सूर्य आत्मा व पिता के कारक कहलाते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वर्तमान में सूर्य मकर राशि (शनि की राशि) में विराजमान हैं। 13 फरवरी 2026 को कुंभ राशि (दृक पंचांग के अनुसार) में गोचर करेंगे। जहां पहले से ही बुध विराजमान हैं।
दोनों ग्रहों के कुंभ राशि में आने से सूर्य व बुध की युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण होगा। इसका प्रभाव 15 मार्च 2026 तक रहेगा, क्योंकि इसके बाद सूर्य मीन राशि में गोचर कर जाएंगे। इस राजयोग का सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलेगा, लेकिन 3 राशियों को विशेष फल प्राप्त हो सकता है। आइए जानते हैं इन भाग्यशाली राशियों के बारे में…
कुंभ राशि पर प्रभाव:
- बुधादित्य राजयोग जातकों के लिए शुभ साबित हो सकता है।
- व्यक्तित्व में निखार के साथ आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है।
- व्यापार में मुनाफे के साथ धनलाभ की प्राप्ति हो सकती है।
- इस अवधि में संपत्ति, वाहन या घर खरीद सकते हैं।
- करियर की दृष्टि से समय अनुकूल रह सकता है।
- भौतिक सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी हो सकती है।
- नौकरीपेशा लोगों को नई नौकरी के अवसर मिल सकते हैं।
- समाज में मान-सम्मान बढ़ सकता है।
मेष राशि पर प्रभाव:
- आय में वृद्धि के प्रबल योग बनेंगे। आय के नए-नए स्त्रोत खुल सकते हैं।
- परिवार और किस्मत का साथ मिलेगा।
- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए समय अनुकूल रहेगा।
- आकस्मिक धनलाभ की प्राप्ति हो सकती है।
- कर्ज से मुक्ति मिल सकती है।
- नौकरीपेशा लोगों को नई नौकरी के लिए प्रस्ताव मिल सकते हैं।
- घर-परिवार में सुख-शांति बनी रह सकती है।
मिथुन राशि पर प्रभाव
- बुधादित्य राजयोग जातकों का भाग्य चमका सकता है।
- विदेश में व्यापार करते हैं तो लाभ मिलने के प्रबल योग हैं।
- नौकरीपेशा जातकों को नौकरी में प्रमोशन और वेतन में वृद्धि का लाभ मिल सकता है।
- लंबे समय से रुक हुए कामों को गति मिल सकती है।
- आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
- धार्मिक या आध्यात्मिक यात्रा के लिए परिस्थितियां अनुकूल रहेंगी।
- इस अवधि में सेहत अच्छी बनी रह सकती है।
- प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए समय उत्तम रहेगा।
कब बनता है बुधादित्य राजयोग
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आदित्य का मतलब सूर्य से होता है। यह राजयोग कुंडली में सूर्य और बुध के एक ही भाव (राशि) में एक साथ होने पर बनता है। यह राजयोग कुंडली के जिस भाव में मौजूद रहता है, उसे वह मजबूत बना देता है।
कुंडली में बुध और सूर्य के एक साथ होने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।
धन, सुख-सुविधा, वैभव, उच्च पद और मान-सम्मान और करियर में तरक्की मिलती है।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य वैदिक ज्योतिष मान्यताओं/पंचांग-आधारित गोचर गणना पर तैयार की गई है। व्यक्ति-विशेष पर परिणाम जन्मकुंडली, लग्न और दशा पर निर्भर करते हैं। MP Breaking News किसी भी भविष्यवाणी/दावे की गारंटी नहीं देता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)





