अक्सर देखा जाता है कि लड़का-लड़की और परिवार दोनों एक-दूसरे को पसंद कर लेते हैं, शादी की बातें आगे बढ़ने लगती हैं, लेकिन जैसे ही कुंडली मिलान होता है और उसमें नाड़ी दोष निकल आता है, पूरा मामला अटक जाता है। कई परिवार डर के कारण रिश्ता तोड़ भी देते हैं।
दरअसल, सनातन परंपरा में विवाह को केवल दो लोगों का नहीं बल्कि दो परिवारों और दो जीवन यात्राओं का मिलन माना गया है। इसी कारण शादी से पहले कुंडली मिलान की परंपरा बनी, ताकि भविष्य में जीवन सुखमय रहे। ऐसे में नाड़ी दोष को सबसे गंभीर दोषों में गिना जाता है।
नाड़ी दोष क्या होता है?
ज्योतिष शास्त्र में विवाह से पहले वर-वधू की कुंडली का मिलान किया जाता है, जिसे अष्टकूट मिलान कहा जाता है। इसमें कुल 36 गुणों का मिलान होता है। इनमें से नाड़ी को सबसे ज्यादा 8 अंक दिए जाते हैं, इसलिए इसका महत्व सबसे अधिक माना जाता है।
नाड़ी कितने प्रकार की होती है?
आदि नाड़ी
मध्य नाड़ी
अंत्य नाड़ी
जब विवाह के लिए चुने गए लड़का और लड़की दोनों की नाड़ी एक जैसी होती है, तो उसे नाड़ी दोष कहा जाता है। ऐसी स्थिति में नाड़ी के पूरे 8 अंक कट जाते हैं और कुंडली मिलान कमजोर माना जाता है। यही वजह है कि कई बार अच्छे रिश्ते भी सिर्फ इस कारण रुक जाते हैं।
विवाह में नाड़ी दोष को बाधक क्यों माना जाता है?
नाड़ी दोष को लेकर ज्योतिष और आयुर्वेद दोनों के अपने तर्क हैं। माना जाता है कि यदि इसे नजरअंदाज किया जाए तो वैवाहिक जीवन में कुछ समस्याएं आ सकती हैं।
संतान सुख पर असर की मान्यता
ज्योतिष मान्यता के अनुसार, समान नाड़ी वाले दंपत्ति को संतान सुख में कठिनाई हो सकती है। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि संतान कमजोर स्वास्थ्य वाली हो सकता है। हालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इस बात की पुष्टि नहीं करता, फिर भी पारंपरिक परिवार इस बात को गंभीरता से लेते हैं।
स्वास्थ्य और प्रकृति का असंतुलन
आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर तीन दोषों वात, पित्त और कफ से मिलकर बना है। नाड़ी का संबंध भी इन्हीं से जोड़ा जाता है। समान नाड़ी होने पर पति-पत्नी की प्रकृति समान हो सकती है, जिससे स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन पर असर पड़ सकता है।
वैवाहिक जीवन में मतभेद की आशंका
कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि समान स्वभाव और सोच के कारण टकराव भी ज्यादा हो सकता है। दोनों एक-दूसरे के विचारों को स्वीकार न कर पाएं, जिससे झगड़े और तनाव की स्थिति बन सकती है। हालांकि, यह हर मामले में सच हो ऐसा जरूरी नहीं।
क्या नाड़ी दोष होने पर शादी नहीं करनी चाहिए?
यह सबसे बड़ा सवाल होता है। लेकिन सच्चाई यह है कि नाड़ी दोष होने का मतलब यह नहीं कि शादी असंभव है। ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे अपवाद बताए गए हैं, जिनमें नाड़ी दोष प्रभावी नहीं माना जाता।
नाड़ी दोष कब प्रभावी नहीं होता?
- यदि दोनों का नक्षत्र समान हो लेकिन चरण अलग हों।
- यदि राशि एक हो लेकिन नक्षत्र अलग हों।
- यदि नक्षत्र समान हो लेकिन राशियां अलग हों।
- यदि कुंडली में अन्य ग्रह मजबूत स्थिति में हों।
नाड़ी दोष से बचाव और शांति के उपाय
यदि कुंडली में नाड़ी दोष पाया जाता है और परिवार शादी करना चाहता है, तो ज्योतिष शास्त्र में इसके कुछ उपाय बताए गए हैं।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप
माना जाता है कि विवाह से पहले या बाद में महामृत्युंजय मंत्र का जाप कराने से नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और दांपत्य जीवन सुखद बनता है।
अन्न और वस्त्र दान
जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य दान देने से भी दोष शांत होने की मान्यता है। दान को पुण्य कर्म माना जाता है।
शालिग्राम या कुंभ विवाह
कुछ परंपराओं में विवाह से पहले कन्या का विवाह भगवान विष्णु के प्रतीक शालिग्राम या घड़े से कराया जाता है, जिससे दोष का प्रभाव कम माना जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई सूचना केवल एक सामान्य जानकारी है। उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। MP Breaking News इसकी पुष्टि नहीं करता।





