HANS RAJYOG 2025 : ज्योतिष शास्त्र में देवताओं के गुरू बृहस्पति की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। देवगुरू बृहस्पति हर 13 महीने में राशि बदलते है।गुरु कर्क राशि में उच्च और मकर राशि में नीच के होते है। गुरु ग्रह (बृहस्पति) धनु और मीन राशि के स्वामी है। वे ज्ञान, धर्म, और भाग्य के कारक माने जाते हैं।वर्तमान में गुरू कर्क राशि में विराजमान है जिससे हंस राजयोग बना हुआ है जिसका प्रभाव दिसंबर में खत्म हो जाएगा। इसके बाद नए साल में 2 जून 2026 को गुरू फिर मिथुन से निकलकर अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करेंगे जिससे दोबारा से हंस महापुरूष राजयोग बनेगा, जिसका प्रभाव अक्टूबर 2026 तक रहने वाला है।यह राजयोग 3 राशियों के लिए बेहद शुभ रहने वाला है।आईए जानते है इन भाग्यशाली राशियों के बारें में……….
हंस राजयोग का राशियों पर प्रभाव
कर्क राशि का प्रभाव : गुरू का गोचर और हंस राजयोग का बनना जातकों के लिए लाभप्रद सिद्ध हो सकता है। जीवन के कई क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते है। प्रतियोगी परीक्षाओं वालों को सफलता मिल सकती है इस अवधि में घर, संपत्ति या वाहन खरीद सकते है। लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिल सकता है।नौकरी में प्रमोशन के साथ वेतनवृद्धि का लाभ मिल सकता है। बिजनेस में मुनाफा मिल सकता है। स्टूडेंट्स को पढ़ाई में सफलता मिलेगी। समाज में मान- सम्मान बढ़ेगा।
मेष राशि पर प्रभाव: हंस राजयोग का बनना जातकों के लिए फलदायी सिद्ध हो सकता है। आय में वृद्धि हो सकती है। इस अवधि में निवेश से लाभ मिल सकता हैं।आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगेगी। व्यापार और निवेश से लाभ मिल सकता है। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। परिवार में सुख और सहयोग मिलेगा। इस अवधि में यात्रा के योग बनेंगे । मान सम्मान में वृद्धि होगी।
कन्या राशि पर प्रभाव: हंस राजयोग का बनना जातकों के लिए फलदायी सिद्ध हो सकता है। आय में वृद्धि हो सकती है।आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगेगी। अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। नौकरी या बिजनेस में तरक्की के रास्ते खुलेंगे। संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार मिल सकता है।स्वास्थ्य में सुधार होगा।आय में जबरदस्त वृद्धि होगी। भाग्य का साथ मिलेगा। रिश्तेदारों और परिवारजनों के साथ संबंध मजबूत होंगे। यात्राओं से लाभ मिल सकता है।
कुंडली में कब बनता है हंस राजयोग
वैदिक ज्योतिष में हंस राजयोग को शुभ माना जाता है।जब किसी की कुंडली में बृहस्पति लग्न हो और यहां से चंद्रमा से पहले, चौथे, सातवें और दसवें भाव में कर्क, धनु या मीन राशि में होता हैं तो हंस राजयोग का शुभ योग बनता है। जिस भी जातक की कुंडली में बृहस्पति केंद्र भाव में होकर मूल त्रिकोण स्वगृही और उच्च राशि का होता है तो हंस राजयोग का निर्माण होता है। इस तरह के राजयोग से जातकों के जीवन में अच्छी सफलता, सुख, समृद्धि और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है।इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)






