ज्योतिष में शुक्र को दैत्यों का गुरु और बुध को ग्रहों का राजकुमार माना जाता है। जब भी दोनों ग्रह चाल बदलते हैं तो योग-संयोग बनते हैं। इसी क्रम में मई अंत में दोनों ग्रह मिलकर लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण करने वाले है। यह राजयोग मिथुन राशि (बुध की राशि) में बनेगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, वर्तमान में सौन्दर्य, सुख और वैभव के कारक कहे जाने वाले शुक्र मेष राशि में हैं और 14 मई को मिथुन राशि (दृकपंचांग के अनुसार) में गोचर करेंगे। वहीं संचार, बुद्धि व व्यापार के कारक माने जाने वाले बुध कुंभ राशि में विराजमान हैं। 29 मई को अपनी स्वराशि मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। मिथुन राशि में दोनों ग्रहों के साथ आने से लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण होगा। इस राजयोग के बनने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। वैसे तो इस राजयोग का सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा लेकिन 3 राशियों को विशेष फल की प्राप्ति हो सकती है। आइए जानते हैं इन भाग्यशाली राशियों के बारे में…
इन राशियों को मिलेगा विशेष लाभ
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- मिथुन राशि पर प्रभाव: लक्ष्मी नारायण राजयोग जातकों के लिए फलदायी साबित हो सकता है। आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि हो सकती है। समाज में मान-सम्मान बढ़ने के प्रबल योग है। लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिल सकता है। जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर होंगे । साझेदारी के व्यापार में बड़ा मुनाफा मिल सकता है। व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा।
- तुला राशि पर प्रभाव: परिवार के साथ भाग्य का पूरा सहयोग मिलने के प्रबल संकेत हैं। बिगड़े हुए काम बन सकते हैं। भौतिक सुख-साधनों में वृद्धि हो सकती है। किसी तीर्थ यात्रा या विदेश यात्रा पर जाने की संभावना बनेगी। राजयोग जातकों को सकारात्मक साबित हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और निवेश से लाभ मिलने के योग बनेंगे।
- कन्या राशि पर प्रभाव: राजयोग से करियर और कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता मिल सकता है। नई नौकरी की तलाश पूरी हो सकती है। पदोन्नति और वेतन वृद्धि का लाभ मिल सकता है। व्यापारियों को निवेश से लाभ हो सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के प्रबल योग हैं। बिजनेस का विस्तार करने के लिए समय अनुकूल रहेगा। बेरोजगार लोगों के लिए नौकरी के अवसर मिल सकते हैं।
कुंडली में कब बनता है “Laxmi Narayan Rajyog
- वैदिक ज्योतिष में लक्ष्मी नारायण राजयोग को सबसे शुभ योगों में से एक माना जाता है। इसे धन, ऐश्वर्य, बुद्धि और कला का प्रतीक माना जाता है।
- जब किसी जातक की जन्म कुंडली के किसी एक ही भाव में बुध और शुक्र एक साथ स्थित होते हैं, तो लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण होता है।
- इस राजयोग से जातकों के जीवन में धन के साथ मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
- माना जाता है कि जिसकी कुंडली में यह राजयोग बनता है उस पर लक्ष्मी जी की विशेष कृपा बरसती है, वहां धन धान्य के प्रबल योग बनते हैं।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य वैदिक ज्योतिष मान्यताओं/पंचांग-आधारित गोचर गणना पर तैयार की गई है। व्यक्ति-विशेष पर परिणाम जन्मकुंडली, लग्न और दशा पर निर्भर करते हैं। MP Breaking News किसी भी भविष्यवाणी/दावे की गारंटी नहीं देता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)