बालाघाट जिले के सुसवा पंचायत के हुड्डू टोला और सेकी टोला के लोगों के लिए बारिश सिर्फ मौसम बदलने की खबर नहीं लाती, बल्कि हर साल एक बड़ी परेशानी भी लेकर आती है।
गांव के पास बने नाले में पानी बढ़ते ही लोगों का रास्ता मुश्किल हो जाता है। करीब 500 लोगों की आबादी वाले इन टोला के ग्रामीणों को आज भी एक पुल का इंतजार है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है, जिन्हें बारिश के दिनों में नाला पार करके स्कूल जाना पड़ता है।
बालाघाट में पुल का इंतजार तीन साल से जारी
हुड्डू टोला और सेकी टोला के ग्रामीण लंबे समय से नाले पर पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। अगस्त 2023 में यह मांग खुलकर सामने आई थी। उस समय सरपंच प्रकाश बाहे के नेतृत्व में ग्रामीणों ने पुल निर्माण को लेकर विरोध जताया था। ग्रामीणों ने अपनी परेशानी बताते हुए यहां तक चेतावनी दी थी कि अगर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे सामूहिक इस्तीफा देने जैसे कदम पर भी विचार करेंगे।
इसके बाद 26 अगस्त 2023 को जन समस्या निवारण शिविर लगाया गया। इस शिविर में ग्रामीणों की समस्या अधिकारियों के सामने रखी गई। बताया गया कि ग्रामीणों की मांग पर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा यानी RES और लोक निर्माण विभाग यानी PWD के अधिकारियों ने पुल निर्माण का एस्टीमेट तैयार कर जल्द काम शुरू कराने का लिखित आश्वासन दिया था।
2023 में मिला था लिखित आश्वासन
ग्रामीणों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह यही है कि उन्हें केवल मौखिक भरोसा नहीं दिया गया था। उनके अनुसार जन समस्या निवारण शिविर में संबंधित विभागों की ओर से पुल निर्माण का एस्टीमेट तैयार कर काम शुरू कराने की बात लिखित रूप से कही गई थी।
आमतौर पर किसी सड़क या पुल के निर्माण के लिए पहले सर्वे, एस्टीमेट, तकनीकी मंजूरी, बजट और टेंडर जैसी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इतने लंबे समय के बाद भी उन्हें निर्माण शुरू होने की कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है।
बारिश में स्कूली बच्चों की बढ़ जाती है परेशानी
पुल नहीं होने का सबसे सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। सामान्य दिनों में बच्चे किसी तरह नाला पार करके स्कूल पहुंच जाते हैं, लेकिन बारिश के दौरान पानी बढ़ने पर रास्ता जोखिम भरा हो जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक तेज बारिश के समय कई बार बच्चों को घर से स्कूल भेजना मुश्किल हो जाता है। परिवारों को डर रहता है कि कहीं बच्चा पानी के तेज बहाव में न फंस जाए। ऐसे में कुछ बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और उनकी पढ़ाई छूट जाती है।
मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी जोखिम
पुल नहीं होने की समस्या केवल स्कूली बच्चों तक सीमित नहीं है। गांव में किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक खराब हो जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य स्थिति में मरीज को किसी तरह नाले के रास्ते बाहर ले जाया जा सकता है, लेकिन बारिश के समय पानी बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे समय में कुछ मिनट की देरी भी परेशानी बढ़ा सकती है।
करीब 500 लोगों की आबादी के लिए जरूरी है स्थायी रास्ता
हुड्डू टोला और सेकी टोला में करीब 500 गोंड जनजातीय आबादी के रहने की बात ग्रामीणों की ओर से कही गई है। इतने लोगों के लिए रास्ते की समस्या को केवल बरसात की छोटी परेशानी मानकर नहीं देखा जा सकता।
गांव के लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए बाहर जाना पड़ता है। बच्चों को स्कूल जाना है, लोगों को बाजार जाना है, किसानों को अपने काम के लिए आवाजाही करनी है और जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल ले जाना पड़ता है।
हर बारिश में सामने आती है वही पुरानी समस्या
ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के दौरान नदी, नाले और कच्चे रास्तों की समस्या अक्सर सामने आती है। गर्मी और सर्दी के दिनों में रास्ता सामान्य दिखाई देता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही पानी का बहाव पूरी तस्वीर बदल देता है।
हुड्डू टोला और सेकी टोला के ग्रामीण भी इसी समस्या का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि बारिश के दिनों में नाले का पानी बढ़ने से रास्ता पार करना खतरनाक हो जाता है।
अब ग्रामीणों ने दी कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी
लंबे समय से समाधान नहीं मिलने के बाद ग्रामीणों ने अब आंदोलन की चेतावनी दी है। सोमवार को ग्रामीणों ने कहा कि अगर पुल निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं हुई तो वे जिला मुख्यालय पहुंचेंगे।
ग्रामीण बालाघाट कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी दे रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार मांग करने और अधिकारियों से आश्वासन मिलने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। अब वे अपनी मांग को लेकर बड़े स्तर पर आवाज उठाने की तैयारी में हैं।






