बालाघाट की ऐश्वर्या बिसेन का IIM में चयन, घर परिवार में खुशी की लहर

बालाघाट की ऐश्वर्या बिसेन का IIM में चयन, घर परिवार में खुशी की लहर

बालाघाट/सुनील कोरे

बालाघाट की प्रतिभाशाली बेटी ऐश्वर्या बिसेन का आईआईएम रोहतक में प्रवेश के लिए चयन हुआ है। प्रतियोगी परीक्षा कैट में सफलता के पश्चात आईआईएम में प्रवेश मिलता है। बहुमुखी प्रतिभा की धनी ऐश्वर्या बिसेन ने एमआईटीएस ग्वालियर से इलेक्ट्रॉनिक एवं कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग किया है और वर्तमान में एसी सेंचुरी पुणे में कार्यरत है।

ऐश्वर्या बिसेन, बालाघाट वार्ड नं 13 निवासी राष्ट्रीय पंवार क्षत्रिय महासभा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक बिसेन तथा श्रीमती मां गढ़कालिका पंवार महिला संगठन बालाघाट की सचिव श्रीमती लता की सुपुत्री है। ऐश्वर्या बिसेन की सफलता पर पंवार क्षत्रिय संगठन के जिलाध्यक्ष खीरसागर पारधी, श्रीमती भारती पारधी, डॉ. शेरसिंह बिसेन, राज हरिनखेरे (उपाध्यक्ष रास्ट्रीय राजा भोज स्मारक समिति) ललित पारधी (संरक्षक राजाभोज पवार युवा संगठन), राजा भोज पंवार युवा संगठन के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय पंवार क्षत्रिय महासभा के सहकोषाध्यक्ष दिलीप राहंगडाले, सचिव अरूण तुरकर, कोषाध्यक्ष नरेश पारधी, संरक्षक राहुल बिसेन, डिलेश्वर राहंगडाले, ललित ऐड़े, देवेन्द्र बबलू बिसेन, डॉ. अमित बिसेन, डॉ. विकास बिसेन, डॉ. अक्षय चौहान, हरीश राहंगडाले, माही चौहान, इंद्रेश्वर चौधरी, तूफानसिंह पारधी, भोलेश्वर पटले, राजू गौतम सहित सभी पदाधिकारियों एवं मां गढ़कालिका पंवार महिला संगठन की अध्यक्ष श्रीमती कल्पना तुरकर, उपाध्यक्ष श्रीमती आशा पटले, श्रीमती सीमा चौधरी, श्रीमती वर्षा बिसेन, श्रीमती मिनाक्षी राहंगडाले सहित सभी पदाधिकारियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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