नाबालिग के साथ हुई दरिंदगी के खिलाफ युवाओं में आक्रोश ,बीच चौराहे पर पुतले को फांसी पर लटकाया

नाबालिग के साथ हुई दरिंदगी के खिलाफ युवाओं में आक्रोश ,बीच चौराहे पर पुतले को फांसी पर लटकाया

बैतूल, वाजिद खान| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बैतूल (Betul) में एक 13 साल की दलित नाबालिग बालिका के साथ दुराचार कर उसकी हत्या करने की कोशिश की गई । आरोपी ने पीड़िता के सिर पर वार किया और गड्ढे में फेंक कर उसके ऊपर कांटे और पत्थर डाल दिये । घटना बैतूल के सारणी थाना क्षेत्र के घोड़ाडोंगरी इलाके की है जहां सोमवार की दरमियानी रात एक 13 साल की नाबालिग बालिका अपने खेत में काम करने गई थी ,पड़ोस खेत के मालिक ने बालिका को अकेले देख उसे बहला-फुसलाकर अपने खेत में घुमाने ले गया और उसके साथ जोर जबरदस्ती कर दुराचार किया । जब बालिका चिल्लाने लगी तो उसके साथ मारपीट की और उसके सिर पर पत्थर मार दिया ।

इसके बाद पीड़िता को बेहोशी की हालत में गड्ढे में फेंक कर जिंदा दफनाने की कोशिश की गई और उसके ऊपर पत्थर और कांटे डाल दिए । जब बालिका घर नहीं पहुंची तो परिजन उसे खेत में तलाश करने गए और उन्हें बालिका गड्ढे में पत्थरों के नीचे दबी मिली थी जिसे इलाज हेतु हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था जहाँ हालत बिगड़ने पर पीड़िता को बैतूल से भोपाल रेफर किया गया हालत ज्यादा बिगड़ने पर उसे भोपाल से नागपुर रेफर किया गया| जहाँ उसका इलाज जारी है।

इस घटना से नाराज बैतूल के युवाओं में खासा आक्रोश देखने को मिला जिसके चलते आरोपी के पुतले को बीच चौराहे पर फांसी पर टांगकर उसे आग के हवाले किया गया, साथ ही सरकार से मांग की गई कि ऐसे दरिंदो को तत्काल फांसी दी जाए ताकि आगे किसी भी बच्ची के साथ कोई आरोपी इस तरह का कृत्य करने की हिम्मत भी न करे ।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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