पुश्तैनी जमीन में नाम सही करने पटवारी ने मांगी 42000 रुपये रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ दबोचा

मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टोलरेंस की नीति अपनाने के निर्देश दे रखे हैं, लोकायुक्त संगठन सहित अन्य एजेंसियों को निर्देश हैं कि वे घूसखोरों पर कड़ा एक्शन लें, जिसके परिणामस्वरुप लगातार घूसखोर रंगे हाथ पकडे जा रहे हैं।
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मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दिए हैं, निर्देशों के पालन में लोकायुक्त पुलिस मध्य प्रदेश लगातार एक्शन ले रही है और घूसखोरों को पकड़ रही है, आज जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने महिला एवं बाल विकास विभाग छिंदवाड़ा में पदस्थ चार महिला अधिकारियों को रिश्वत लेते पकड़ा वहीं ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस की टीम में भिंड में एक पटवारी को घूस लेता पकड़ा।

लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय ग्वालियर से मिली जानकारी के मुताबिक भिंड जिले के गोरमी के रठियापुरा निवासी किसान संजय सिंह ने एक शिकायती आवेदन दिया था जिसमें हल्का पटवारी द्वारा उनसे 42000 रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी।

पटवारी ने तीन किस्तों में मांगी रिश्वत 

किसान संजय सिंह ने आवेदन में बताया कि उनकी पुश्तैनी जमीन में नाम को सही कराने के एवज में पटवारी अमन शर्मा द्वारा 42,000/- रुपए की रिश्वत तीन किस्तों में रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत मिलने के बाद एसपी ने जाँच के आदेश दिया और सत्यापन कराया।

पहली क़िस्त लेकर जनपद पंचायत परिसर में बुलाया 

शिकायत का सत्यापन कराया तो शिकायत सही पाई गई आज 06 अक्टूबर को आवेदक से रिश्वत राशि लेना तय हुआ। आरोपी ने पहली किस्त 14000/- रुपए लेकर आवेदक को जनपद पंचायत मेहगांव के पीछे परिसर में बुलाया। रिश्वत मांगे जाने के प्रमाण मिलने के बाद ट्रैप प्लान की गई।

जींस की जेब में रखी रिश्वत, टीम ने दबोचा  

आवेदक किसान संजय सिंह ने पटवारी अमन शर्मा को जनपद पंचायत के पीछे परिसर में रिश्वत दी जिसे पटवारी ने जींस की जेब में रख ली। रिश्वत राशि लेते ही आसपास तैनात लोकायुक्त दल ने आरोपी पटवारी को पकड़ लिया।
आरोपी के विरुद्ध धारा 7, 13(1) बी,13(2) पीसी एक्ट 1988( संशोधित अधिनियम 2018) के अंतर्गत कार्यवाही की गई है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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