भिंड जिले में मौसम का अचानक बदला मिजाज लोगों के लिए मुसीबत बन गया। मंगलवार शाम तेज आंधी और हल्की बारिश के साथ चली तेज हवाओं ने कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कुछ ही मिनटों में कई गांवों में पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और कच्चे-पक्के मकानों को नुकसान पहुंचा। प्रशासन नुकसान का आकलन करने में जुटा है, जबकि प्रभावित परिवारों की मदद के प्रयास भी शुरू कर दिए गए हैं।
गोरमी थाना क्षेत्र के डिडोना गांव में सबसे दर्दनाक घटना सामने आई। 30 वर्षीय मंजू बघेल तेज आंधी से बचने के लिए एक पुरानी दीवार के पास खड़ी हो गई थीं। इसी दौरान तेज हवाओं के दबाव से दीवार गिर गई और वह मलबे के नीचे दब गईं। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हादसे के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई पुराने और जर्जर निर्माण लंबे समय से खतरा बने हुए हैं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं हो सकी।
भिंड आंधी-बारिश से कई गांव प्रभावित
आंधी का असर सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रहा। खोकीपुरा गांव में एक मकान की छत का हिस्सा गिरने से 55 वर्षीय महादेवी और उनकी 11 वर्षीय नातिन खुशी घायल हो गईं। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं हसनपुर गांव में पुरानी दीवार गिरने से 75 वर्षीय कुंदन सिंह और 45 वर्षीय हिम्मत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। डॉक्टरों के अनुसार घायलों का इलाज जारी है और उनकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है।
इस प्राकृतिक आपदा में पशुधन को भी नुकसान पहुंचा है। कुछ गांवों में मलबे के नीचे दबकर पशुओं की मौत की खबरें सामने आई हैं। ग्रामीण इलाकों में पशुपालन कई परिवारों की आय का प्रमुख साधन है, ऐसे में यह नुकसान आर्थिक रूप से भी भारी माना जा रहा है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों से जानकारी जुटाने और नुकसान का रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बिजली सप्लाई और यातायात पर पड़ा असर, राहत कार्य जारी
तेज हवाओं के कारण जिले के कई हिस्सों में सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए। इससे कई गांवों में घंटों तक बिजली सप्लाई बंद रही। बिजली बंद होने से पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हुई, क्योंकि कई क्षेत्रों में पानी की सप्लाई मोटर और पंपों के जरिए होती है। बिजली विभाग की टीमें लगातार लाइनों को दुरुस्त करने में जुटी हुई हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण काम में दिक्कतें आ रही हैं।
यातायात पर भी इसका असर देखने को मिला। कई ग्रामीण सड़कों पर पेड़ गिरने से रास्ते बंद हो गए, जिन्हें हटाने के लिए स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर प्रयास किए। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून पूर्व की गतिविधियों के दौरान इस तरह की तेज आंधी और बारिश की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, कमजोर दीवारों और पुराने पेड़ों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए।
भिंड में आई यह आंधी एक बार फिर याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सतर्कता और समय पर चेतावनी कितनी जरूरी होती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों पर रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय अधिकारियों को सूचना दें।






