MP के 24 बंधुआ मजदूरों को तमिलनाडु के इरोड से रेस्क्यू किया गया, बैतूल-हरदा के श्रमिक सुरक्षित घर लौटे, सरकार देगी 30 हजार सहायता राशि

मध्यप्रदेश के श्रमिकों को राज्य सरकार, जिला प्रशासन और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समन्वित प्रयासों से रेस्क्यू कर सुरक्षित वापस लाया गया। इनमें बैतूल जिले के 20 और हरदा जिले के 4 श्रमिक शामिल हैं। बैतूल रेलवे स्टेशन पर प्रशासन ने उनका स्वागत किया और सभी को सुरक्षित उनके गांव भेजने की व्यवस्था की गई।
Bonded Labourers Rescued

Bonded Labourers Rescued

तमिलनाडु के इरोड जिले में मध्यप्रदेश के 24 बंधुआ मजदूरों को रेस्क्यू किया गया। राज्य सरकार, जिला प्रशासन और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के त्वरित हस्तक्षेप से ये श्रमिक सुरक्षित रूप से घर लौट आए हैं। जानकारी के अनुसार पिछले 4-5 महीनों से ये मज़दूर प्रताड़ना, शोषण और बंधुआ मजदूरी की स्थिति में थे।

इन श्रमिकों में ज्यादातर कोरकू और गोंड जनजाति के हैं जो बैतूल के भीमपुर ब्लॉक के काबरा, बोरकुंड, बीरपुरा और बासिंदा गांवों के निवासी हैं। ये सभी रोजगार की तलाश में तमिलनाडु के इरोड जिले में गए थे और खेती के काम में लगे थे। लेकिन होली पर जब उन्होंने छुट्टी मांगी तो उन्हें इनकार कर दिया गया और बंधक बनाकर जबरन काम कराया जा रहा था।

मध्यप्रदेश के बंधुआ मजदूरों को रेस्क्यू किया

तमिलनाडु के इरोड जिले से बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए 24 मध्य प्रदेश के श्रमिकों की सुरक्षित घर वापसी हुई है। इनमें बैतूल जिले के 20 और हरदा जिले के 4 श्रमिक शामिल हैं। इस मामले की जानकारी राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य प्रकाश ऊईके को मिली थी। इसके बाद बैतूल जिला प्रशासन ने तुरंत सक्रियता दिखाई। जिला प्रशासन, पुलिस, श्रम विभाग और तमिलनाडु प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित किया गया। वनवासी कल्याण आश्रम, समाजसेवी श्री प्रवीण ढोलके और विक्रांत कुमरे ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राज्य सरकार के त्वरित हस्तक्षेप और समन्वित प्रयासों से यह रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा।

जिला प्रशासन ने की घर पहुंचने की व्यवस्था

श्रमिकों के बैतूल रेलवे स्टेशन पहुंचने पर कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने उनका आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर वनवासी कल्याण आश्रम के जिला अध्यक्ष महेश्वर भलावी, जिला श्रम पदाधिकारी धम्मदीप भगत सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। रेलवे स्टेशन पर प्रशासन ने सभी श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित की और उनसे चर्चा कर उनकी स्थिति जानी। कलेक्टर ने श्रमिकों को आश्वस्त किया कि प्रशासन द्वारा उनके सुरक्षित घर पहुंचने की पूरी व्यवस्था की गई है। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी समस्या से बचने के लिए राजस्व, पुलिस और श्रम विभाग उनके संपर्क में बने रहेंगे।

सरकार द्वारा सहायता राशि की घोषणा

रेस्क्यू किए गए सभी श्रमिकों को शासन की ओर से 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी ताकि वे अपने जीवन को फिर से व्यवस्थित कर सकें। श्रम पदाधिकारी को आर्थिक सहायता स्वीकृति के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने उनके पुनर्वास और आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने की बात भी कही है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
Follow Us :GoogleNews