निज़ामुद्दीन मरकज से भोपाल आए 31 लोग क्वारंटाइन, कोरोना जांच के लिये सेंपल भेजे

निज़ामुद्दीन मरकज से भोपाल आए 31 लोग क्वारंटाइन, कोरोना जांच के लिये सेंपल भेजे

भोपाल

दिल्ली निजामुद्दीन से मध्यप्रदेश आये 107 लोगों में से भोपाल में 31 लोग मिले हैं।  ऐशबाग के रहमानी मस्जिद से 11 लोगों की जमात मिली है। इन 31 लोगों के अलावा 50 जमातें राजधानी की अलग अलग मस्जिदों में ठहरी थीं और हर जमात में 20 या उससे ज्यादा लोग थे। इन

जानकारी के मुताबिक ये लोग बर्मा से दिल्ली के निजामुद्दीन और फिर वहां से भोपाल आये हैं। जहांगीराबाद की 3 मस्जिदों में ये लोग रूके हैं। जहांगीराबाद की सिकंदराजहां मस्जिद से 8 लोगों की जमात मिली है, वहीं दूसरी मस्जिद से 12 लोगों की जमात मिली। ये सारे लोग दिल्ली निजामुद्दीन मजार में भी रुके थे। अब प्रशासन ने सभी की जमात को क्वारंटाइन कर दिया है और स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम ने इन सभी का निरीक्षण किया है। इनके  सेंपल कोरोना जांच के लिए भेजे गए हैं। इतनी तादाद में बाहर से आए लोगों के बाद अब भोपाल को सुरक्षा के लिहाज से 4 ज़ोन में बांट दिया गया है। नए शहर को पुराने शहर से जोड़ने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है, ताकि लोग ज्यादा एक दूसरे के संपर्क में ना आ सकें।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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