MP News: पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, 27 माह का बकाया एरियर देने और न्यूनतम पेंशन वृद्धि की मांग

पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव (वित्त) को पत्र लिखकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को जनवरी 2016 से मार्च 2018 तक के बकाया एरियर जल्द जारी करने की मांग की है।
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मध्यप्रदेश पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव (वित्त) को पत्र लिखा है और सातवें वेतन आयोग के तहत 27 महीने का बकाया एरियर देने की मांग की है। एसोसिएशन ने 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक के लंबित एरियर को जारी करने का अनुरोध किया है। साथ ही न्यूनतम पेंशन 7,750 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये प्रतिमाह करने का भी पत्र में जिक्र किया गया है।

एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद कुमार सक्सेना और संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों की तरह पेंशनर्स को भी 01 जनवरी 2016 से संशोधित पेंशन के अनुसार वित्तीय लाभ मिलना चाहिए था। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सातवें वेतन आयोग का लाभ देने के संबंध में वित्त सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा अनुशंसा भी की गई थी, लेकिन मध्यप्रदेश वित्त विभाग ने इन सिफारिशों को अनदेखा कर दिया। पेंशनर्स को 01 अप्रैल 2018 से पुनरीक्षित पेंशन का लाभ दिया गया, जिसके कारण 01 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक (कुल 27 माह) का एरियर्स बाकी है।

एसोसिएशन के प्रांतीय सचिव यशवंत सिंह बैस और भोपाल जिला अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति द्वारा पेंशनर्स के जीवन-यापन की लागत और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम पेंशन ₹9,000/- प्रति माह निर्धारित करने की अनुशंसा की गई थी। इसके विपरीत, वित्त विभाग ने मनमाने ढंग से न्यूनतम पेंशन ₹7,750/- प्रति माह तय की है, जो सातवें वेतन आयोग की मूल भावनाओं के खिलाफ है।

एसोसिएशन के उपाध्यक्ष शैलेंद्र श्रीवास्तव, संतोष ठाकुर और शकुंतला वर्मा ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि वर्तमान न्यूनतम पेंशन ₹7750/- के स्थान पर ₹9000/- प्रति माह की जाए। पदाधिकारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में पेंशनर्स को आर्थिक संबल प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है और उनकी जायज मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए।

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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

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