महाराष्ट्र के पनवेल से 1200 श्रमिक आज पहुंचे भोपाल

महाराष्ट्र के पनवेल से 1200 श्रमिक आज पहुंचे भोपाल

भोपाल। पूरे देश में लॉकडॉउन (Lockdown) चल रहा है, सभी से घरों में रहने की अपील सरकार और प्रशासन द्वारा की जा रही है| लेकिन उन गरीब मजदूरों का क्या जो अपने घरों से हजारों किलोमीटर दूर किसी दूसरे राज्य में फंसे है| दरअसल प्रदेश के हजारों मजदूर काम के सिलसिले में बाहरी राज्यों में फंसे हुए हैं जिन्हे वापस लाने के काम मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) कर रही है| आज महाराष्ट्र के पनवेल से 1200 मजदूर स्पेशल ट्रेन (Specia Train) के माध्यम से भोपाल के हबीबगंज स्टेशन (Habibganj Station) पहुंचे| जहां से इन सभी लोगों को 50 बसों में बैठाकर उनके गृह जिले के लिए रवाना किया गया| आपकों बता दें कि ये मजदूर डेढ़ महीने से लॉकडाउन के कारण पनवेल में फंसे हुए थे|

पनवेल से 15 घंटे का सफर भूखा किया है तय
हबीबगंज स्टेशन पर पहुंचने के बाद मजदूरों से पता चला कि वह बीते 15 घंटे से भूखे प्यासे ट्रेन में बैठे हैं| मजदूरों का कहना था कि वे 15 घंटे तक भूखे प्यासे रहे हैं| प्रशासन की तरफ से उन्हे केवल 2 पानी की बोटल दी गई थी| पूरे रास्ते छोटे बच्चे भूख की वजह से बिलखते रहे, लेकिन किसी प्रकार की कोई मदद नहीं की गई|
स्टेशन पर मजदूरों की हुई स्क्रीनिंग
स्टेशन पर सुबह से ही जिला प्रशासन ने सभी तरह की तैयारियां कर ली थीं| मजदूरों को उनके गृह जिलों में पहुंचाने के लिए सुबह 5 बजे से ही बसे आ गई थीं| मजदूरों के लिए भोजन, पानी और स्क्रीनिंग दल भी स्टेशन पर मौजूद था| ट्रेन से उतरने के बाद सबसे पहले सभी मजदूरों की स्क्रीनिंग हुई.,,,और उसके बाद उन्हे भोजन देकर बसों से उनके घरों के लिए भेजा गया…..बता दें कि एक बस में 30 मजदूरों को बिठाया गया… प्रशासन की तरफ से सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा गया| अभी तक सरकार दूसरे राज्यों में फंसे करीब 90 हजार प्रवासी मजदूरों को राज्य वापस ला चुकी है|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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