मजबूर हुआ मजदूर: बैलगाड़ी में खुद जुत गए, मंत्री बोले- ‘हर स्तर पर मदद करेगी सरकार’

मजबूर हुआ मजदूर: बैलगाड़ी में खुद जुत गए, मंत्री बोले- ‘हर स्तर पर मदद करेगी सरकार’

भोपाल| मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट (Tulsi Silavat) ने इंदौर (Indore) के सांवेर-बरलाई मार्ग में दो युवकों द्वारा बैलगाड़ी खींचे जाने की घटना पर संज्ञान लेते हुए प्रशासन को पूरी जानकारी लेने के निर्देश दिए हैं| इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस परिवार की वर्तमान स्थिति की पूरी जानकारी लें और उनकी हर संभव मदद करें।

मंत्री सिलावट ने कहा सुनील और पवन नाम के दो भाई निनोरा गांव से शिप्रा की ओर खुद बैलगाड़ी में जुत कर आ रहे थे, यह घटना संज्ञान में आई है| उन्होंने कहा सम्बंधित अधिकारियों को आदेश दिया है सम्पूर्ण घटना की जांच करें| इसके साथ ही पता लगाएं कि क्या कारण हैं किस स्थिति में उन्हें ऐसा करना पड़ा| यह एक गंभीर ओर कष्टदायी घटना है| सभी अधिकारियों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसकी जांच कर सूचित करें| मध्य प्रदेश सरकार सुनील और पवन की मदद करेगी|

गौरतलब हाल ही में उज्जैन की क्षिप्रा नदी की ओर जा रहे मजदूर परिवार का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था| इस वीडियो में दो मजदूर एक बैलगाड़ी खींचते नजर आ रहे हैं| उज्जैन के पास निनोरा गांव से शिप्रा नदी की और जा रहे परिवार के बारे में बताया जा रहा है कि बच्चों ‌के इलाज के लिए अपने दोनों बैल बेच दिए, हालांकि वो बच्चों को बचा नहीं पाए| एक महीने पहले उनकी मौत हो गई| सुनील और उसका परिवार फुटपाथ पर रहते हैं| लॉकडाउन खुला तो सांवेर से उज्जैन के क्षिप्रा की ओर अस्थि विसर्जन करने निकल पड़े| इस‌ दौरान रास्ते में रोककर ‌किसी ने उनका वीडियो बनाया, ‌जो अब वायरल हो रहा है|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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